Galgotias University की साख पर सवाल, मच गया बवाल !
Galgotias University (गलगोटियास यूनिवर्सिटी) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। ग्रेटर नोएडा स्थित इस निजी विश्वविद्यालय का नाम हालिया AI समिट में पेश किए गए रोबोटिक डॉग को लेकर सुर्खियों में है। रोबो डॉग से लेकर सॉकर ड्रोन तक, तकनीकी प्रदर्शनों ने यूनिवर्सिटी की पारदर्शिता और दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे मामले में प्रोफेसर नेहा सिंह के बयान के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को आधिकारिक सफाई और माफी जारी करनी पड़ी।
क्या है Galgotias University का पूरा मामला?
AI समिट के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में दावा किया गया कि यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने “ओरियन” नामक रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय की खुद की खोज बताया।
हालांकि, बाद में स्पष्ट हुआ कि यह डिवाइस चीनी कंपनी Unitree द्वारा निर्मित Unitree Go2 नामक एआई-संचालित रोबोटिक डॉग है। यह डिवाइस ऑनलाइन लगभग 2,800 अमेरिकी डॉलर (करीब 2.3 लाख रुपये) में उपलब्ध है।
सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया कि इस इंपोर्टेड डिवाइस को स्वदेशी उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
Galgotias University की सफाई और माफी
18 फरवरी को जारी प्रेस रिलीज में गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने कहा कि:
- AI समिट में हुए भ्रम के लिए वह गहराई से माफी मांगती है।
- मीडिया से बात करने वाली प्रतिनिधि को प्रोडक्ट के तकनीकी मूल (Technical Origin) की पूरी जानकारी नहीं थी।
- कैमरे पर आने के उत्साह में तथ्यात्मक रूप से गलत बयान दे दिया गया।
- संबंधित स्टाफ सदस्य को प्रेस से बात करने की अनुमति भी नहीं थी।
यूनिवर्सिटी ने ये भी स्पष्ट किया कि उसने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोडॉग का निर्माण उसने स्वयं किया है।

पहले क्या कहा था Galgotias University ने?
इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में Galgotias University ने कहा था कि:
- रोबोडॉग Unitree से खरीदा गया है।
- इसे एक “चलता-फिरता क्लासरूम” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
- छात्र इसके साथ प्रयोग कर रहे हैं और तकनीकी सीमाओं को समझ रहे हैं।
यूनिवर्सिटी के अनुसार, ये डिवाइस शिक्षण और रिसर्च के उद्देश्य से खरीदा गया है, न कि उसे स्वदेशी इनोवेशन बताने के लिए।

AI समिट से बाहर होने पर विवाद
कुछ सरकारी सूत्रों का दावा था कि इस विवाद के बाद गलगोटियास यूनिवर्सिटी को AI समिट से बाहर जाने के लिए कहा गया।
हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस दावे से इनकार किया। ताजा प्रेस बयान में कहा गया कि आयोजकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए संस्थान ने स्वयं ही वैन्यू खाली किया।
यूनिवर्सिटी का कहना है कि उसे सरकार की ओर से कोई औपचारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ।
क्यों बढ़ा Galgotias University का विवाद?
- विदेशी डिवाइस को लेकर पारदर्शिता पर सवाल
- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
- प्रोफेसर के कथित बयान की विश्वसनीयता
- AI समिट जैसे बड़े मंच पर तकनीकी दावों की गंभीरता
आज के डिजिटल युग में, जहां AI और रोबोटिक्स जैसे विषय राष्ट्रीय गौरव और ‘मेक इन इंडिया’ से जुड़े हैं, वहां ऐसे मामलों में छोटी सी तथ्यात्मक गलती भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है।
Galgotias University का ये मामला दिखाता है कि टेक्नोलॉजी और रिसर्च से जुड़े आयोजनों में पारदर्शिता और स्पष्ट संचार कितना महत्वपूर्ण है। यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक तौर पर माफी मांगकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन इस विवाद ने उसकी छवि पर असर जरूर डाला है।
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