US-IRAN के बीच बिगड़े हालात, ट्र्रंप-खामेनेई में आर-पार !
जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच चली तीन घंटे की अहम परमाणु वार्ता बिना किसी स्पष्ट नतीजे के समाप्त हो गई। इस बैठक ने एक बार फिर US–IRAN संबंधों में बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है। वार्ता ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी चरम पर है।
US-IRAN की जिनेवा में क्या बात हुई ?
स्विट्जरलैंड के शहर Geneva में आयोजित इस दूसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों ने लगभग तीन घंटे तक चर्चा की।
ईरान की ओर से विदेश मंत्री Abbas Araghchi शामिल हुए, जबकि अमेरिकी पक्ष से दूत Steve Witkoff और Jared Kushner मौजूद रहे। इन वार्ताओं की मध्यस्थता Oman कर रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बातचीत में कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।
खामेनेई की ट्रंप को चेतावनी
ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान को कमजोर नहीं कर सकता। उन्होंने ये भी कहा कि “दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को भी ऐसा जवाब मिल सकता है, जिससे वो संभल न सके।”

खामेनेई ने मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी वॉरशिप पर हमले की धमकी दी, जिससे US-IRAN तनाव और बढ़ गया है।
US-IRAN और परमाणु कार्यक्रम
इस वार्ता में सबसे बड़ा मतभेद चर्चा के दायरे को लेकर सामने आया:
- ईरान चाहता है कि बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहे।
- अमेरिका बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर भी चर्चा करना चाहता है।
यही मतभेद US-IRAN समझौते की राह में बड़ी बाधा बन सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य गतिविधि
वार्ता के दौरान ईरान ने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के अनुसार, ये कदम सैन्य अभ्यास के कारण एहतियातन उठाया गया।
क्यों है होर्मुज स्ट्रेट महत्वपूर्ण?
- दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है।
- यहां किसी भी रुकावट से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है।
- ईरान पहले भी कह चुका है कि हमले की स्थिति में वह इस मार्ग को पूरी तरह बंद कर सकता है।
इससे साफ है कि US-IRAN टकराव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ट्रंप अपने एजेंडा पर कायम
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन “सबसे अच्छा विकल्प” हो सकता है। उन्होंने ये भी दावा किया कि अगर पहले समझौता हो जाता, तो अमेरिका को B-2 बॉम्बर भेजकर ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना नहीं बनाना पड़ता।
इस बयान के बाद US-IRAN कूटनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं।
US-IRAN के बीच अब आगे क्या?
फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि अगला दौर कब होगा और क्या दोनों देश किसी समझौते पर पहुंच पाएंगे।
लेकिन इतना तय है कि:
- पश्चिम एशिया में सैन्य हलचल बढ़ रही है।
- तेल बाजार अस्थिर हो सकता है।
- वैश्विक कूटनीति पर US-IRAN तनाव का गहरा असर पड़ेगा।
दुनिया की नजर अब अगली US-IRAN बैठक पर टिकी है।
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