Noida Engineer Death News: प्रशासनिक लापरवाही ने ली Yuvraj की जान ?
नोएडा (Noida) के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे ने प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर सामने ला दी है। एक निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट में पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (Yuvraj Mehta) की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। इस प्रकरण में नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) के CEO डॉ. एम. लोकेश को पद से हटा दिया गया है और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
कैसे हुआ Noida में हादसा ?
युवराज मेहता गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और नोएडा के टाटा यूरेका पार्क में रहते थे। शुक्रवार देर रात वो ऑफिस से घर लौट रहे थे, तभी सेक्टर-150 के पास एक निर्माणाधीन साइट पर उनकी कार अनियंत्रित होकर बिना बैरिकेडिंग वाले गहरे गड्ढे में गिर गई। ये गड्ढा बेसमेंट निर्माण के लिए खोदा गया था और उसमें भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था।

पुलिस के अनुसार घटना की सूचना रात करीब 12:15 बजे मिली, लेकिन लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार सुबह उनका शव निकाला जा सका। बचाव कार्य में फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस, SDRF और NDRF की टीमें शामिल रहीं।
रेस्क्यू में देरी के आरोप
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू में देरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक डिलीवरी एजेंट ने बताया कि यदि समय पर बचाव कार्य शुरू होता तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी। ठंड, गहरे पानी और बाहर निकली लोहे की सरियों के कारण बचाव दल को नीचे उतरने में कठिनाई हुई, जिससे बहुमूल्य समय नष्ट हुआ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। मेरठ जोन के एडीजी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT गठित की गई है, जिसमें मंडलायुक्त और PWD के मुख्य अभियंता भी शामिल हैं। SIT को पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

घटना के बाद विरोध प्रदर्शन और जन आक्रोश को देखते हुए सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. एम. लोकेश को पद से हटाकर वेटिंग में डाल दिया है। इससे पहले एक जूनियर इंजीनियर को भी सेवा से हटाया जा चुका था।
Yuvraj की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार युवराज मेहता ने करीब दो घंटे तक ठंडे पानी में जिंदगी और मौत से संघर्ष किया। रिपोर्ट में एंटीमॉर्टम ड्राउनिंग की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों ने बताया कि उनके फेफड़ों में एक से दो लीटर तक पानी भरा हुआ था। अत्यधिक ठंड के कारण उन्हें हाइपोथर्मिया हुआ और घबराहट की स्थिति में कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी मौत हो गई।
सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां न तो बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी बोर्ड और न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए थे। घने कोहरे में ये गड्ढा दिखाई ही नहीं देता था। आरोप है कि इस खतरनाक स्थल को लेकर पहले भी संबंधित प्राधिकरण और बिल्डरों से शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बिल्डर्स पर FIR और प्रशासनिक कार्रवाई
युवराज मेहता के पिता की शिकायत पर नॉलेज पार्क थाने में लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और एमजे विशटाउन प्लानर लिमिटेड के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। दोनों कंपनियों पर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगाए गए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
Noida में लापरवाही पर सख्त संदेश
ये हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर खामियों और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम माना जा रहा है। ऐसे में सरकार की हालिया कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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