China पर US के गंभीर आरोप और Super Soldier, कुछ बड़ा होने वाला है !
दुनिया की सैन्य ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा अब केवल हथियारों तक सीमित नहीं रही। आधुनिक युद्ध में तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जैव-प्रौद्योगिकी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में चीन(China) पर ये आरोप लगाए जा रहे हैं कि वो जेनेटिक तकनीक के जरिए ऐसे सैनिक (Super Soldier) तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जिन पर न अत्यधिक गर्मी का असर होगा, न कड़ाके की ठंड का और न ही रेडिएशन का।
सुरक्षा और खुफिया मामलों के विशेषज्ञों का दावा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन कई गुप्त प्रयोगशालाओं में तथाकथित “सुपर सोल्जर” विकसित करने पर शोध कर रहा है। इन सैनिकों की शारीरिक ताकत, सहनशक्ति और मानसिक क्षमता आम सैनिकों से कहीं अधिक हो सकती है।
China, बायोटेक्नोलॉजी, Super Soldier और भविष्य का युद्ध
हाल ही में अमेरिका के रक्षा विभाग (पेंटागन) की एक रिपोर्ट में भी ये कहा गया है कि चीन बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन का लक्ष्य वर्ष 2049 तक अपनी सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना बनाना है। इसमें जैव-प्रौद्योगिकी और जेनेटिक रिसर्च की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में जेनेटिक रूप से बदले हुए सैनिक युद्ध में उतरे, तो ड्रोन और पारंपरिक हथियार भी कम प्रभावी लग सकते हैं।
जेनेटिक बदलाव से कैसे बन सकते हैं अजेय सैनिक ?
जानकारों के अनुसार, डीएनए में बदलाव करके सैनिकों को बेहद कठिन परिस्थितियों में लड़ने लायक बनाया जा सकता है। ऐसे सैनिक रेगिस्तान की भीषण गर्मी, बर्फीले इलाकों की ठंड, समुद्र के ठंडे पानी और यहां तक कि रेडिएशन वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं।

कुछ सैनिकों को विशेष रूप से गर्म इलाकों के लिए तैयार किया जा सकता है, जबकि कुछ को ठंडे और जलमय क्षेत्रों में लड़ने की क्षमता दी जा सकती है। ये भी आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसे सैनिक विकसित किए जा सकते हैं जो परमाणु हमलों के बाद पैदा होने वाले रेडिएशन के प्रभाव को भी काफी हद तक सहन कर सकें।
Super Soldier बनाने के संभावित तरीके
विशेषज्ञों के मुताबिक, सुपर सोल्जर बनाने के तीन मुख्य तरीके हो सकते हैं।
पहला तरीका है दिमाग और मशीन को जोड़ने वाली तकनीक, जिसमें ब्रेन-चिप या न्यूरल इंटरफेस का उपयोग किया जाता है।
दूसरा तरीका ऐसे विशेष जैविक ड्रग्स का इस्तेमाल है, जो अस्थायी रूप से सैनिकों की क्षमता बढ़ा सकते हैं।
तीसरा और सबसे विवादास्पद तरीका है सीधे जेनेटिक बदलाव करना, जिससे इंसान को अधिक मजबूत, तेज और मानसिक रूप से सक्षम बनाया जा सके। ऐसे सैनिक न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि निर्णय लेने और रणनीति समझने में भी आगे हो सकते हैं।
पहले भी लग चुके हैं China पर आरोप
चीन में जेनेटिक प्रयोगों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। कुछ साल पहले जेनेटिक बदलाव के जरिए बच्चों के जन्म का मामला उजागर होने पर एक वैज्ञानिक को सजा दी गई थी। पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारियों और शोधकर्ताओं का कहना है कि चीन में बड़े पैमाने पर जेनेटिक डेटा एकत्र किए जाने के संकेत मिले हैं। आरोप है कि ये डेटा भविष्य में मानव सुधार या सैन्य प्रयोगों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि संबंधित कंपनियां इन आरोपों से इनकार करती रही हैं।
अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो ये पूरी दुनिया को चेताने वाली ख़बर होगी और पूरी दुनिया के सामने एक नई चुनौती होगी। जैव-प्रौद्योगिकी के जरिए सैनिकों को “अजेय” बनाने की कोशिश न केवल युद्ध के स्वरूप को बदल सकती है, बल्कि नैतिक और कानूनी सवाल भी खड़े कर सकती है। आने वाले समय में ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसे प्रयोगों पर कैसे प्रतिक्रिया देता है।
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