NATO से जुड़ी रिपोर्ट में चेतावनी, रूस के निशाने पर Starlink !
NATO देशों की खुफिया एजेंसियों की हालिया रिपोर्ट्स ने अंतरिक्ष सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, ख़बर है कि रूस एक नया एंटी-सैटेलाइट हथियार विकसित कर सकता है, जिसका संभावित निशाना एलन मस्क की स्टारलिंक सैटेलाइट (Starlink Satellite) सर्विस हो सकती है। ये आशंका ऐसे समय में सामने आई है, जब यूक्रेन युद्ध में स्टारलिंक ने संचार और तकनीकी सहायता के जरिए अहम भूमिका निभाई है।
क्यों निशाने पर है Starlink ?
स्टारलिंक एक व्यावसायिक सैटेलाइट नेटवर्क है, जो दुनिया भर में हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा देता है। यूक्रेन में युद्ध के दौरान इसका इस्तेमाल सैन्य संचार, ड्रोन संचालन, हथियारों की दिशा तय करने और सरकारी कामकाज में बड़े पैमाने पर हुआ। इसी वजह से रूस इसे पश्चिमी देशों की रणनीतिक अंतरिक्ष ताकत का हिस्सा मानता है।
नया एंटी-सैटेलाइट हथियार कैसे काम कर सकता है?
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस जिस हथियार पर काम कर रहा है, वो जोन-इफेक्ट तकनीक पर आधारित हो सकता है। इस तकनीक में अंतरिक्ष में सैकड़ों या हजारों छोटे लेकिन भारी धातु के छर्रे (पेलेट्स) छोड़े जाते हैं। ये छर्रे किसी खास ऑर्बिट में फैलकर एक साथ कई सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो स्टारलिंक नेटवर्क का बड़ा हिस्सा एक साथ ठप हो सकता है।

अंतरिक्ष मलबे का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का हथियार इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक होगा। इससे पैदा होने वाला मलबा सिर्फ स्टारलिंक ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों और निजी कंपनियों के सैटेलाइट्स के लिए भी खतरा बन सकता है। रूस और चीन खुद भी संचार, रक्षा और निगरानी के लिए हजारों सैटेलाइट्स पर निर्भर हैं, इसलिए ऐसा कदम उनके लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकता है।
स्पेस सिक्योरिटी एक्सपर्ट विक्टोरिया सैमसन का मानना है कि इस तरह का हथियार अंतरिक्ष में बेकाबू हालात पैदा कर सकता है। वहीं, कनाडा की सेना के स्पेस डिवीजन के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल क्रिस्टोफर हॉर्नर का कहना है कि इस संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि रूस पहले भी अंतरिक्ष में खतरनाक विकल्पों पर विचार कर चुका है।
Starlink Satellite, रूस की प्रतिक्रिया और पहले के दावे !
इन आरोपों पर रूस की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। इससे पहले रूस संयुक्त राष्ट्र में अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती रोकने की बात कह चुका है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ये कह चुके हैं कि रूस का अंतरिक्ष में परमाणु हथियार तैनात करने का इरादा नहीं है।
हाल ही में रूस ने S-500 नाम की एक नई ग्राउंड-बेस्ड मिसाइल सिस्टम तैनात करने का दावा किया है, जो निचली ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट्स को निशाना बना सकती है। हालांकि, जिस नए हथियार की चर्चा हो रही है, वो इससे अलग और ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि ये एक साथ कई सैटेलाइट्स को प्रभावित कर सकता है और छोटे छर्रों की वजह से इसे ट्रैक करना भी मुश्किल होगा।
अगर इस तरह का एंटी-सैटेलाइट हथियार वास्तव में विकसित और इस्तेमाल किया जाता है, तो ये सिर्फ किसी एक देश या कंपनी की समस्या नहीं होगी। इससे पूरी दुनिया की अंतरिक्ष सुरक्षा, संचार व्यवस्था और तकनीकी ढांचे पर गहरा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि नाटो देशों की चेतावनी को गंभीरता से लिया जा रहा है और अंतरिक्ष को एक नए युद्धक्षेत्र में बदलने की आशंका पर वैश्विक बहस तेज हो रही है।
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