Chandigarh Mayor Election चंडीगढ़ की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है। भारी गहमागहमी, राजनीतिक रणनीति और पारदर्शी प्रक्रिया के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सौरभ जोशी को चंडीगढ़ नगर निगम का नया मेयर चुना गया। खास बात ये रही कि 1996 के बाद पहली बार मेयर चुनाव में हाथ उठाकर सार्वजनिक मतदान हुआ, जिसने इस चुनाव को पारदर्शिता की मिसाल बना दिया।
सौरभ जोशी का राजनीतिक सफर
43 वर्षीय सौरभ जोशी चंडीगढ़ की राजनीति का जाना-पहचाना और प्रभावशाली नाम हैं। पेशे से एडवोकेट सौरभ जोशी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) से की थी। वे एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता स्वर्गीय जय राम जोशी 1990 के दशक में चंडीगढ़ भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं, वे वरिष्ठ भाजपा नेता विनीत जोशी के भाई भी हैं।
वार्ड 12 से मेयर तक
सौरभ जोशी वार्ड नंबर 12 का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें चंडीगढ़ के प्रमुख सेक्टर 15, 16, 17 और 24 शामिल हैं। नगर निगम हाउस में वे अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए जाने जाते हैं। कचरा प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर उनका रुख हमेशा मुखर रहा है।
जनता का सेवक बनने का दावा
नए मेयर सौरभ जोशी खुद को केवल एक राजनेता नहीं बल्कि जनता का सेवक मानते हैं। उनका कहना है कि वे संख्या बल से ऊपर उठकर जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देंगे। मेयर चुने जाने के बाद वे भावुक नजर आए और अपने पिता की तस्वीर हाथ में लेकर इस जीत को उन्हें समर्पित किया।

Chandigarh Mayor Election में मतदान का पूरा गणित
इस बार चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 36 वोट थे, जिनमें 35 पार्षदों के और 1 सांसद का वोट शामिल था।
- भाजपा के सौरभ जोशी को 18 वोट मिले
- आम आदमी पार्टी (AAP) के योगेश ढींगरा को 11 वोट
- कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह गाबी को 7 वोट
भाजपा के सभी 18 पार्षदों ने एकजुट होकर सौरभ जोशी के समर्थन में हाथ उठाए। वहीं, कांग्रेस के पार्षद और सांसद मनीष तिवारी वोटिंग के बाद सदन छोड़कर चले गए, जिससे आगे के चुनावों में कांग्रेस को एक भी वोट नहीं मिला।
Chandigarh Mayor Election में भाजपा का क्लीन स्वीप
मेयर के बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर भी भाजपा ने जीत दर्ज की।
- सीनियर डिप्टी मेयर: जसमनजीत सिंह (18 वोट)
- डिप्टी मेयर: सुमन शर्मा (18 वोट)
कांग्रेस द्वारा चुनाव बहिष्कार और आप-कांग्रेस गठबंधन टूटने का सीधा फायदा भाजपा को मिला।
क्या होगी प्राथमिकता ?
मेयर बनने के बाद सौरभ जोशी ने चंडीगढ़ के सौंदर्यकरण, स्वच्छता रैंकिंग में सुधार, और नगर निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने को अपने कार्यकाल की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया है।
कुल मिलाकर, Chandigarh Mayor Election न सिर्फ भाजपा की बड़ी राजनीतिक जीत है, बल्कि पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया का भी उदाहरण बन गया है। सौरभ जोशी के नेतृत्व में अब चंडीगढ़ नगर निगम से स्थिरता और विकास की नई उम्मीदें जुड़ गई हैं।
