Chicken Neck पर सद्गुरु के बयान से 78 साल पुरानी रणनीतिक भूल पर उठे सवाल
बेंगलुरु स्थित सद्गुरु सन्निधि में आयोजित एक सत्संग के दौरान ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिलिगुड़ी कॉरिडोर (इसे ही Chicken Neck कहते हैं) को लेकर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने इस संकरे भू-भाग को भारत के विभाजन से जुड़ी “78 साल पुरानी गलती” बताया और कहा कि ये समस्या 1971 में ही सुलझाई जा सकती थी।
सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आम तौर पर “चिकन नेक” कहा जाता है, भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। ये क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। सद्गुरु ने इसे भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से एक कमजोर कड़ी बताया।
Chicken Neck से जुड़ी 1971 की गलती में सुधार की संभावना
सद्गुरु ने 1971 के मुक्ति युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भारत के पास इस भौगोलिक विसंगति को सुधारने का अवसर था। उनके अनुसार, 1946-47 के दौर में ये संभव नहीं था, लेकिन 1971-72 में भारत की स्थिति कहीं अधिक सशक्त थी। इसके बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
“कमजोरी, राष्ट्र की नींव नहीं हो सकती”
अपने विचार रखते हुए सद्गुरु ने कहा कि कोई भी राष्ट्र कमजोरी के आधार पर खड़ा नहीं हो सकता। उन्होंने प्रतीकात्मक भाषा में कहा कि “राष्ट्र मुर्गे बने रहकर नहीं बनाए जा सकते, उन्हें हाथी बनना पड़ता है।” उनका आशय ये था कि सिलिगुड़ी कॉरिडोर को केवल सुरक्षित ही नहीं, बल्कि इतना मजबूत बनाया जाना चाहिए कि भविष्य में किसी भी प्रकार का खतरा राष्ट्र की अखंडता को चुनौती न दे सके।
सीमाओं से परे दुनिया एक सपना
सद्गुरु ने ये भी स्पष्ट किया कि सीमाओं से मुक्त दुनिया एक सुंदर कल्पना हो सकती है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ये व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि समय से पहले ऐसे आदर्शों को थोपना अव्यावहारिक सोच है। फिलहाल, राष्ट्रों को अपनी सीमाओं और सुरक्षा को मजबूत करना ही होगा।
Chicken Neck पर सुधार की आवश्यकता पर जोर
अपने वक्तव्य के अंत में सद्गुरु ने कहा कि भले ही ये गलती 78 साल पहले हुई हो, लेकिन अब भी सुधार की आवश्यकता है। उनका मानना है कि सिलिगुड़ी कॉरिडोर को “पोषण” देकर इतना सक्षम बनाया जाना चाहिए कि वो भारत की क्षेत्रीय अखंडता को मजबूती से संभाल सके।
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