Tarique Rahman बदल पाएंगे बर्बाद होते बांग्लादेश की किस्मत ?
हिंसा में जल रहे बांग्लादेश की राजनीति में एक अहम मोड़ उस समय देखने को मिला, जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान करीब (Tarique Rahman) 17 साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौटे। उनकी वापसी पर राजधानी ढाका में हजारों समर्थकों ने भव्य स्वागत किया। ये केवल एक राजनीतिक वापसी नहीं थी, बल्कि बांग्लादेश के भविष्य को लेकर एक नए विजन की घोषणा भी थी।
Tarique Rahman: सुरक्षित, लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश बनाना है
ढाका में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने कहा कि उनका सपना एक सुरक्षित, लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की 40 मिलियन से अधिक युवा आबादी ही आने वाले समय में नेतृत्व करेगी और राष्ट्र के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उनके अनुसार, युवाओं को अभी से जिम्मेदारी उठानी होगी ताकि देश को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

अपने भाषण में तारिक रहमान ने 1971 के मुक्ति संग्राम और वर्ष 2024 के हालिया आंदोलनों का उल्लेख करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि 1971 में स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस बांग्लादेश का सपना देखा था, उसे साकार करना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है। साथ ही, उन्होंने हाल ही में मारे गए 24वें आंदोलन के युवा कार्यकर्ता उस्मान हादी को भी याद किया, जो लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे थे।
Tarique Rahman:शहीदों के खून का कर्ज चुकाना है
तारिक रहमान ने कहा कि अगर 1971 और 2024 के शहीदों के खून का कर्ज चुकाना है, तो देशवासियों को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य बदले की राजनीति नहीं, बल्कि न्याय, शांति और स्थिरता पर आधारित राष्ट्र का निर्माण है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश में अभी भी कुछ ताकतें अशांति फैलाने की कोशिश कर रही हैं, इसलिए संयम और धैर्य बेहद जरूरी है।

अपने विजन को साझा करते हुए तारिक रहमान ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर के प्रसिद्ध कथन “आई हैव ए ड्रीम” की तर्ज पर कहा, “मेरे पास एक योजना है।” इस योजना में लोकतंत्र की बहाली, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, आर्थिक अधिकारों की सुरक्षा और सभी धर्मों व समुदायों के लिए समान सम्मान शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों सभी का देश है, और यहां हर नागरिक को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार है।
उन्होंने ये भी कहा कि बीएनपी देश में शांति, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए काम करेगी। आर्थिक विकास के साथ-साथ राजनीतिक सुधार को उन्होंने समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। अपने भाषण के अंत में तारिक रहमान ने जनता से सहयोग की अपील की और अपनी मां खालिदा जिया के स्वास्थ्य के लिए दुआ करने को कहा।
17 साल बाद तारिक रहमान की ये वापसी न केवल बीएनपी के लिए बल्कि पूरे बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आगामी चुनावों से पहले उनका ये संदेश साफ है—एक ऐसा बांग्लादेश, जहां सुरक्षा, लोकतंत्र और सपने साथ-साथ आगे बढ़ें।
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