Republic Day 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा-गणतंत्र दिवस, सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला पावन अवसर
Republic Day 2026 News
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित करते हुए भारतीय लोकतंत्र, संविधान और सांस्कृतिक एकता के महत्व का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस (Republic Day 2026) केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला पावन अवसर है, जो हमें देश की दशा और दिशा पर विचार करने की प्रेरणा देता है।
स्वतंत्रता संग्राम का स्मरण
राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता संग्राम का स्मरण करते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत की नियति बदली और देश ने स्वतंत्र होकर अपने भविष्य का निर्माण स्वयं करना शुरू किया। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ। इसी संविधान ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाया।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता जैसे आदर्शों पर आधारित है। ये मूल्य न केवल हमारे लोकतंत्र की पहचान हैं, बल्कि देश की एकता और अखंडता का भी मजबूत आधार हैं। संविधान निर्माताओं की दूरदृष्टि ने विविधताओं से भरे भारत को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।

Republic Day की पूर्व संध्या पर युवा शक्ति का ज़िक्र
अपने संबोधन के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ये स्पष्ट किया कि आज का युवा देश के बहुआयामी विकास की दिशा तय कर रहा है। संविधान, लोकतंत्र और सांस्कृतिक एकता के मूल्यों को आत्मसात कर युवा शक्ति भारत को एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे स्मरणोत्सव राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैली भारत की सांस्कृतिक एकता को हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर बताया, जो आज भी लोकतंत्र को जीवंत बनाए हुए है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये गीत राष्ट्रप्रेम और भारत माता की वंदना का प्रतीक है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत को सुब्रमण्य भारती, श्री अरबिंदो सहित अनेक महान विभूतियों ने विभिन्न भाषाओं में प्रस्तुत कर इसकी भावना को जन-जन तक पहुंचाया।
राष्ट्रपति ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती और ‘पराक्रम दिवस’ का उल्लेख करते हुए युवाओं से उनके अदम्य साहस और देशभक्ति से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘जय हिंद’ का उद्घोष आज भी राष्ट्र गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
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