नारे से नहीं, आचरण से करें मोहब्बत का इज़हार: Maulana Arshad Madani
देश में चल रहे ‘I Love Muhammad’ जैसे नारों और प्रदर्शनों के बीच, जमीयत उलमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) ने मुसलमानों को एक अहम और शांतिपूर्ण संदेश दिया है। उनका कहना है कि सच्ची मोहब्बत नारे लगाने से नहीं, बल्कि नबी करीम के चरित्र और आचरण को अपनाने से होती है।
✦ “बाजारों में नारे नहीं, दिलों में मोहब्बत ज़रूरी है”
उत्तर प्रदेश के कानपुर में आयोजित तहफ़्फ़ुज़ ख़त्म-ए-नुबुव्वत कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “बाजारों में ‘I Love Muhammad’ लिख देना मोहब्बत नहीं है। अगर सच्चा इश्क़ है, तो नबी की सीरत (जीवनशैली) को अपने दिल और जीवन में उतारो।“
उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वे अपने व्यवहार, सहनशीलता और इंसानियत भरे आचरण से इस्लाम की असल तालीम (शिक्षा) को दुनिया के सामने पेश करें।
✦ “नफरत का जवाब मोहब्बत से दो”
मौलाना मदनी ने इस बात पर चिंता जताई कि आज समाज में नफरत, पक्षपात और संकीर्णता के बीज बहुत गहरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा, “इस्लाम अमन, सब्र और मोहब्बत का मज़हब है, और हमें नफरत का जवाब नफरत से नहीं, बल्कि मोहब्बत और शांति से देना चाहिए — यही नबी का तरीका है, और यही अल्लाह का हुक्म भी।”
✦ “हर बात को धार्मिक रंग देकर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा”
मदनी ने कहा कि आज हर मुद्दे को धार्मिक रंग देकर एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, और कानून का दुरुपयोग कर एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये एक संवैधानिक संकट की ओर इशारा करता है, जिसमें अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
✦ “इस्लाम हर इंसान के साथ इंसाफ की बात करता है”
मौलाना ने याद दिलाया कि इस्लाम में जात-पात, धर्म या समुदाय की कोई भेदभाव नहीं है। उन्होंने कहा, “हम सब एक ही सृष्टिकर्ता की मख़लूक़ हैं और इस्लाम हर इंसान के साथ न्याय और भलाई का संदेश देता है।“
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Maulana Arshad Madani: नबी ने दुश्मनों के साथ भी भलाई की
मौलाना मदनी ने नबी करीम की शिक्षाओं की मिसाल देते हुए कहा कि उन्होंने न केवल अपने चाहने वालों के साथ, बल्कि अपने दुश्मनों के साथ भी भलाई की। मुसलमानों को चाहिए कि वे भी नबी की सीरत को अपनाकर समाज में शांति और भाईचारे को बढ़ावा दें।
उन्होंने कहा:
“जब तक तुम अपने पड़ोसी के लिए वही पसंद नहीं करते जो अपने लिए पसंद करते हो, तब तक तुम मोमिन नहीं हो सकते।“
✦ “घर-घर तक पहुंच चुकी हैं गुमराह करने वाली ताक़तें”
दारुल उलूम देवबंद के कुलपति मुफ्ती अबुल क़ासिम नुमानी ने कहा कि आज भटकाने वाले फितने (विचारधाराएं) घर-घर तक पहुंच चुकी हैं, और मुसलमानों को जागरूक होने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि हर मदरसे में मजलिस-ए-तहफ़्फ़ुज़-ए-ख़त्म-ए-नुबुव्वत बनाई जानी चाहिए ताकि गलतफहमियों का जवाब दिया जा सके।
✦ “नबी आख़िरी पैगंबर हैं – ये एक महान नेमत है”
सम्मेलन में मौलाना सैयद बिलाल अब्दुल हई हसनी नदवी और मुफ्ती मोहम्मद सालेह हसनी सहारनपुरी ने कहा कि ख़त्म-ए-नुबुव्वत (नबी का अंतिम होना) इस्लाम का मूल आधार है। उन्होंने इसे उम्मत-ए-मोहम्मदिया पर अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत और रहमत बताया।
Maulana Arshad Madani: ज़ुबान नहीं, किरदार बोले
मौलाना अरशद मदनी का ये संदेश सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक सामाजिक और नैतिक शिक्षा है — कि समाज को नफरत से नहीं, प्यार, शांति और इंसाफ से बदला जा सकता है।
‘I Love Muhammad’ लिखने से पहले ज़रूरी है कि हम उनकी मोहब्बत को अपने किरदार में उतारें।
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