India के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती आज… वो नेता जो दुश्मन को भी अपनी कविता से कर डालते थे घायल. जानिए उनके जीवन से जुड़े रोचक किस्से.
New Delhi : 3 बार भारत के प्रधानमंत्री रह चुके स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की आज देशभर में जयंती मनाई जा रही है. वो सिर्फ एक प्रधानमंत्री हीं नहीं बल्कि वह भारतीय राजनीति की वो अटल आवाज थे जो विरोधियों के साथ भी मर्यादा निभाती थी. आज जब सियासत तेज़, तीखी और स्तरहीन हो चुकी है… तब अटल जी का जीवन ठहराव, संवाद और राष्ट्रहित की याद दिलाता है. उनकी जयंती केवल सिर्फ उन्हे याद करने का जरिए नहीं बल्कि उनसे सीख लेने का एक अवसर भी प्रदान करती है. आज उनसे जुड़े कुछ ऐसे किस्से आपको बताने जा रहे हैं जो एक राजनेता से कहीं बड़ा विराट व्यक्तित्व बनाते हैं.
पिता के साथ की लॉ की पढ़ाई

Atal Bihari Vajpayee का जन्म 25 दिसंबर 1924 को MP के ग्वालियर में हुआ… उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेई खुद एक शिक्षक और कवि प्रवृत्ति के इंसान थे… और उन्ही का प्रभाव अटल जी के व्यक्तित्व पर भी साफ नज़र आता था. कहते हैं अटल जी ने डीएवी कॉलेज से अपने पिता के साथ ही लॉ की पढ़ाई की थी. जानकार बताते हैं कि दोनों एक ही क्लास में बैठते थे, हॉस्टल में भी एक ही कमरे में रहते थे. जब उनके दोस्तों को इस बात का पता चला तो दोनों बाप-बेटे ने अपने सेक्शन बदल लिए.
पत्रकार से राजनेता बनने की कहानी…

देश के जाने माने लोग ही ये जानते हैं कि Atal Ji की पहचान राजनीति से पहले एक संवेदनशील कवि के रूप में हुआ करती थी. उनकी कविताओं में राष्ट्रवाद की झलक साफ दिखाई पड़ती थी. इसी के साथ मानवीय पीड़ा भी उनकी कविताओं में नजर आती थी. कहते हैं वे जब भी किसी जनसभा में शामिल होते थे, भाषण देने से पहले और बाद में काली मिर्च, मीठी मिश्री का सेवन ज़रूर किया करते थे. उनके लिए खासतौर पर मथुरा से मिश्री मंगवाई जाती थी… वे पत्रकार बनना चाहते थे लेकिन वक्त और हालात ने उन्हे राजनीति के दलदल में धकेल दिया.
आया राम, गया राम के दौर में रहे ‘अटल’

भारतीय जनसंघ जिसे आज भारतीय जनता पार्टी यानी BJP के नाम से आप सब जानते हैं, Atal Ji उसी संगठन से राजनीति की शुरुआत की थी… हालांकि उनकी बहन अक्सर उनकी खाकी पैंट फेंक देती थीं, क्योंकि उनके पिता गवर्नमेंट सर्वेंट थे और परिवार चाहता था कि अटल राजनीति से दूर रहें. लेकिन अटल न सिर्फ एक आदर्श राजनेता थे बल्कि निजी जिंदगी में एक आदर्श इंसान भी थे. वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने थे जिन्होंने 26 राजनीतिक दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. इसके बाद साल 1998 से लेकर साल 2004 तक वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे. इसके अलावा वे पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया था. वर्ना उस दौर में सरकारें बनती बाद में थीं, पहले उन्हे गिराने की साज़िशें रची जाती थीं. जिसे हम आया राम, गया राम के नाम से भी जानते हैं.
परमाणु टेस्ट कर दुनिया को चौंकाया

वो साल 1998 का दौर था… देश में Atal Bihari Vajpayee की सरकार थी… भारत पर बाज़ की तरह से नज़रें गढ़ाए बैठे अमेरिका को चकमा देकर अटल सरकार ने पोखरण परमाणु परीक्षण किया और भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की कतार में खड़ा कर दिया. ये फैसला अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद लिया गया था जो कि इतिहास बन गया. पड़ोसी देश पाकिस्तान तक को इस टेस्ट की भनक तक नहीं लगी थी. इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना Atal Ji की दूरदर्शी सोच का परिणाम थीं. उनकी उसी सोच ने और परियोजनाओं ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को नए आयाम दिए.
शादी नहीं की, लेकिन गोलगप्पे बहुत खाते थे

Atal Bihari Vajpayee अकेले ऐसे नेता थे जिन्हें विपक्ष सुनता भी था और सम्मान भी देता था… उनकी भाषण शैली में कटुता नहीं बल्कि तर्क और मर्यादा होती थी. अटल बिहारी वाजपेयी को तोहफे पसंद नहीं थे. वे गिफ्ट लेने-देने की परंपरा के सख्त खिलाफ थे. हालांकि, उन्हें खाने-पीने का बहुत शौक था. जानकार बताते हैं कि वे घर पर बने भोजन को सबसे बड़ा तोहफा मानते थे. चटकारे लेकर बड़े चाव से गोलगप्पे भी खाते थे… अटल जी ने कभी विवाह नहीं किया… उन्होने जीवन भर सादा, अनुशासित और सार्वजनिक जीवन जिया जो दूसरों के लिए भी मिसाल था. Atal Bihari Vajpayee का पूरा जीवन सत्ता से ज़्यादा सेवा का उदाहरण था. ऐसे महान राजनेता और व्यक्तित्व के धनी अटल जी को खबरीलाल का सादरपूर्वक नमन.
