Artemis-2 Mission अंतरिक्ष में लिखेगा नया अध्याय
नासा का बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस-2 मिशन (Artemis-2 Mission) फरवरी 2026 में लॉन्च हो सकता है। ये मिशन अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा, क्योंकि लगभग 50 साल बाद इंसान फिर चंद्रमा के आसपास की यात्रा करेंगे। इससे पहले 1972 में अपोलो-17 मिशन के तहत इंसान चंद्रमा के पास गया था।
आर्टेमिस-2, नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का दूसरा मिशन है, जिसका उद्देश्य भविष्य में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग और वहां स्थायी मौजूदगी की तैयारी करना है।
Artemis-2 Mission कब और कहां से होगा लॉन्च?
नासा के अनुसार, ख़बर है कि आर्टेमिस-2 मिशन की संभावित लॉन्च डेट 5 या 6 फरवरी 2026 हो सकती है। तकनीकी कारणों से देरी होने पर इसे अप्रैल 2026 तक टाला जा सकता है।

ये मिशन अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39B से उड़ान भरेगा। यही वो ऐतिहासिक लॉन्च पैड है, जहां से अपोलो मिशन भी रवाना हुए थे।
कौन-सा रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट होगा इस्तेमाल?
🚀 स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS)
आर्टेमिस-2 मिशन में नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट इस्तेमाल किया जाएगा। ये दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जाता है और इसके ब्लॉक-1 वर्जन का उपयोग होगा। SLS एक साथ ओरियन स्पेसक्राफ्ट, एस्ट्रोनॉट्स और जरूरी कार्गो को अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है।

🛰️ ओरियन स्पेसक्राफ्ट
इस मिशन में ओरियन स्पेसक्राफ्ट चार एस्ट्रोनॉट्स को लेकर चंद्रमा की परिक्रमा करेगा। इसमें अत्याधुनिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी मौजूद है। चंद्रमा का चक्कर लगाने के बाद ये सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटेगा।
कौन-कौन से एस्ट्रोनॉट्स जाएंगे?
आर्टेमिस-2 मिशन में चार अनुभवी एस्ट्रोनॉट शामिल होंगे:
- रिड वाइजमैन (कमांडर, NASA) – अनुभवी अंतरिक्ष यात्री
- विक्टर ग्लोवर (पायलट, NASA) – चंद्रमा के इतने करीब जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति
- क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट, NASA) – अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला
- जेरमी हैंसन (मिशन स्पेशलिस्ट, कनाडियन स्पेस एजेंसी) – पहले गैर-अमेरिकी जो चंद्रमा के पास जाएंगे

Artemis-2 Mission कितने दिन का होगा और क्या होगा खास?
आर्टेमिस-2 मिशन की अवधि लगभग 10 दिन होगी। इसमें एस्ट्रोनॉट्स फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी पर चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे।
इस दौरान:
- पहले पृथ्वी की कुछ परिक्रमा होगी
- फिर यान चंद्रमा के पीछे से गुजरेगा
- चंद्रमा से न्यूनतम दूरी लगभग 7400 किलोमीटर होगी
- लैंडिंग नहीं होगी, सिर्फ परिक्रमा करके वापसी होगी
मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस मिशन का प्रमुख लक्ष्य मानव के साथ SLS और ओरियन स्पेसक्राफ्ट की टेस्टिंग करना है। इसमें:
- लाइफ सपोर्ट सिस्टम
- नेविगेशन
- कम्युनिकेशन सिस्टम
- गहरे अंतरिक्ष में मानव सुरक्षा
जैसे अहम पहलुओं की जांच की जाएगी। ये मिशन आर्टेमिस-3 (2027) में प्रस्तावित चंद्रमा पर मानव लैंडिंग की नींव रखेगा।
Artemis-2 Mission, भविष्य की राह
2022 में बिना मानव के आर्टेमिस-1 मिशन सफल रहा था। अब आर्टेमिस-2 के जरिए इंसानों के साथ तकनीक की परीक्षा होगी। अगर ये मिशन सफल रहता है, तो नासा का सपना है कि चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाया जाए और आगे चलकर मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजा जाए।
