Delhi Fire Service के लिए निजीकरण की औपचारिक एंट्री… अब Private Agencies के हवाले होंगे Fire Fighters. जल्द नई 50 QRV भी होंगी आउटसोर्स
New Delhi : देश की राजधानी दिल्ली से एक बड़ी खबर आ रही है… राजधानी का Fire Protection System अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. Delhi Fire Service, जो पहले से ही स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, अब निजी कंपनियों के सहारे अपना System को मजबूत करने की तैयारी में है. क्विक रिस्पांस व्हीकल से लेकर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट तक, अब सब कुछ निजी हाथों में लगने वाला है. लेकिन सवाल ये है कि क्या Privatisation से आग पर काबू जल्दी पाया जा सकेगा… या फिर जवाबदेही पर भी संकट खड़ा हो जाएगा?
संसाधन और मैनपावर से जूझता DFS

करीब 1484 वर्ग किलोमीटर में फैली और लगभग 3 करोड़ की आबादी को समेटे राजधानी दिल्ली… जहां हर साल Fire Accidents बढ़ते जा रहे हैं… इन घटनाओं से निपटने की जिम्मेदारी Delhi Fire Service की है, लेकिन हकीकत ये है कि DFS खुद संसाधन और मैनपावर की कमी से जूझ रहा है.
दिल्ली की सड़कों पर 26 नई QRV

Delhi Fire Service के पास फिलहाल 24 Quick Response Vehicle हैं, जो शहर के अलग-अलग एरिया में तैनात हैं… लेकिन अब DFS ने 26 नई QRV और खरीदी हैं, जिन पर पंप लगाने का काम चल रहा है. अधिकारियों की मानें तो मार्च 2026 तक ये सभी गाड़ियां दिल्ली की सड़कों पर नजर आएंगी और दिल्ली के 26 नए इलाकों में तैनात की जाएंगी.
कैसे बेहतर साबित होंगी QRV?

QRV का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये छोटी गाड़ियां होती हैं जो घनी आबादी वाले इलाकों में आसानी से पहुंच जाती हैं… Fire Accident की खबर मिलते ही ये एक मिनट के अंदर रवाना हो जाती हैं. जिससे शुरुआती स्तर पर ही आग पर काबू पाया जा सकता है. लेकिन असली बदलाव इसके आने के बाद शुरू होगा. Delhi Fire Service अब 50 QRV और शामिल करने जा रही है और ये पूरी तरह Out Source होंगी… इन गाड़ियों पर तैनात फायरकर्मी भी Private Companies के होंगे, न कि DFS के नियमित कर्मचारी.
प्राइवेट कंपनियों के हाथों होगी पूरी कमान

दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों की मानें तो पहले चरण में 50 क्यूआरवी आउटसोर्स की जाएंगी… आने वाले समय में Delhi में बड़ी संख्या में आग बुझाने का काम प्राइवेट गाड़ियों और प्राइवेट फायरकर्मियों के जरिए किया जाएगा… खास बात ये है कि ये निजीकरण यहीं नहीं रुकेगा… अब फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और उससे पहले होने वाले निरीक्षण की जिम्मेदारी भी Third Party Agencies को सौंपे जाने की तैयारी है. यानी किसी भवन या संस्थान को Fire NoC देने से पहले होने वाला निरीक्षण भी अब Private Companies करेंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे Process तेज होगा, लेकिन साथ ही जवाबदेही और गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े होंगे. यानी जब आग जैसी Emergency Situation में एक पल की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है, तो क्या ऐसे में निजी हाथों में Fire Safety सौंपना सही फैसला है?
