दिल्ली शराब घोटाला: कोर्ट ने Arvind Kejriwal और मनीष सिसोदिया को किया बरी
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। कथित दिल्ली शराब घोटाले (Excise Policy Case) में कोर्ट ने Arvind Kejriwal, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है।
फैसला सुनाते हुए जज जितेंद्र सिंह ने सीबीआई (CBI) की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा पेश किए गए सबूतों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में कोई भी ठोस प्रमाण पेश करने में पूरी तरह विफल रही है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “सिर्फ बयानों से केस नहीं बनता”
जज जितेंद्र सिंह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूत केवल बयानों पर आधारित हैं और कानून की नजर में स्वीकार योग्य नहीं हैं। कोर्ट ने कहा, “हम लंबे समय तक ठोस सबूतों का इंतजार करते रहे, लेकिन सीबीआई ऐसा कुछ भी पेश नहीं कर पाई जिससे भ्रष्टाचार साबित हो सके।”
हैरानी की बात यह है कि कोर्ट ने केवल आरोपियों को बरी ही नहीं किया, बल्कि सीबीआई के जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए हैं। कोर्ट ने माना कि जांच में वैज्ञानिक और ठोस साक्ष्यों का अभाव था।
Kejriwal-Sisodia के खिलाफ 5 चार्जशीट, 300 गवाह हुए ध्वस्त
साल 2022 से चल रहे इस हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई ने अब तक कुल 5 चार्जशीट (1 मुख्य और 4 पूरक) दाखिल की थीं। 1000 से ज्यादा पन्नों के इन दस्तावेजों में Arvind Kejriwal को आरोपी नंबर-18 और मनीष सिसोदिया को आरोपी नंबर-8 बनाया गया था।
जांच एजेंसी ने 300 से अधिक गवाहों के नाम पेश किए थे, लेकिन कोर्ट ने इन्हें पर्याप्त नहीं माना। आइए जानते हैं वे 4 मुख्य कारण जिनकी वजह से सीबीआई का केस कोर्ट में टिक नहीं पाया:
1. कमीशन बढ़ाने का आरोप साबित नहीं हुआ
सीबीआई का दावा था कि शराब विक्रेताओं का मुनाफा 5% से बढ़ाकर 12% इसलिए किया गया ताकि 6% कमीशन सत्ताधारी पार्टी को मिल सके। कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसके पीछे कोई ठोस सबूत नहीं है, यह केवल एक अनुमान है।
2. सरकारी गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल
सीबीआई ने दिनेश अरोड़ा और शरतचंद्र रेड्डी जैसे आरोपियों को सरकारी गवाह बनाया था। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी को गवाह बनाकर केस फाइल करना सही नहीं है, जब तक कि आपके पास अलग से कोई स्वतंत्र सबूत न हो।
3. 100 करोड़ की रिश्वत का दावा हवा-हवाई
जांच एजेंसी ने ‘साउथ ग्रुप’ के जरिए 100 करोड़ रुपये की रिश्वत और हवाला के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई यह बताने में नाकाम रही कि यह पैसा कब, कहाँ और कैसे लिया गया।
4. ‘साउथ ग्रुप’ शब्द के इस्तेमाल पर फटकार
कोर्ट ने सीबीआई को इस बात पर भी फटकार लगाई कि चार्जशीट में ‘साउथ ग्रुप’ (दक्षिण समूह) जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया गया। कोर्ट ने कहा कि अखंड भारत में इस तरह के क्षेत्रीय शब्दों का उपयोग गलत है; जांच एजेंसी को सीधे कंपनियों के नाम लिखने चाहिए थे।
पारदर्शिता और नीति निर्धारण
अदालत ने अपने फैसले में ये भी स्पष्ट किया कि नई शराब नीति बनाने के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती गई थी। मनीष सिसोदिया द्वारा की गई बैठकें हितधारकों (Stakeholders) के साथ थीं, जो नीति निर्धारण का एक सामान्य हिस्सा हैं। इस फैसले ने न केवल Arvind Kejriwal की राजनीति को नई ऊर्जा दी है, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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