Delhi के तुर्कमान गेट इलाके में Bulldozer Action से खलबली !
दिल्ली (Delhi) के तुर्कमान गेट इलाके में 6 जनवरी की आधी रात को हुई बुलडोजर कार्रवाई (Bulldozer Action) ने राजधानी की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा की गई इस कार्रवाई के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस पर पथराव हुआ, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस पूरे मामले का केंद्र बिंदु यही एक सवाल है कि जिस जमीन पर बुलडोजर चला, वो आखिर किसकी है?
आधी रात को Bulldozer Action और बढ़ता बवाल
दिल्ली नगर निगम की टीम आधी रात को तुर्कमान गेट पहुंची और अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस बल की भारी तैनाती के बावजूद भीड़ उग्र हो गई। लोगों को आशंका थी कि मस्जिद को नुकसान पहुंचाया जाएगा, जिसके चलते पथराव शुरू हो गया। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े। इस हिंसा में एक एसएचओ समेत कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि पांच लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है।

Bulldozer Action, जमीन का मालिकाना हक और असली विवाद
प्रशासन और याचिकाकर्ताओं के अनुसार, फैज-ए-इलाही मस्जिद करीब 0.195 एकड़ जमीन पर बनी है, जिसे वैध माना गया है। लेकिन मस्जिद के बाहर जो निर्माण किया गया था, उसके लिए मस्जिद कमेटी या दिल्ली वक्फ बोर्ड कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके। MCD और सेव इंडिया फाउंडेशन का दावा है कि मस्जिद के बाहर की जमीन पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और एल एंड डी ओ (L&DO) की है और ये रामलीला मैदान का हिस्सा रही है। वहीं, मस्जिद प्रबंधन समिति और दिल्ली वक्फ बोर्ड इस जमीन को वक्फ संपत्ति बताते हुए इसे पुराने कब्रिस्तान से जुड़ा हुआ बताते हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
ये बुलडोजर कार्रवाई सीधे तौर पर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई। 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने रामलीला मैदान और फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास करीब 38,940 वर्ग फुट क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण को अवैध करार देते हुए तीन महीने के भीतर हटाने का निर्देश दिया था। ये आदेश सेव इंडिया फाउंडेशन की याचिका पर दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि वैध हिस्से को नुकसान न पहुंचे, लेकिन अवैध निर्माण हटाया जाए।

MCD मेयर का पक्ष
दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इकबाल ने कहा कि निगम ने केवल हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया है। उनके अनुसार, 1940 में करीब 900 वर्ग मीटर जमीन एल एंड डी ओ द्वारा कब्रिस्तान के लिए लीज पर दी गई थी, जिस पर समय के साथ मस्जिद बन गई। लेकिन मस्जिद के साथ लगते रामलीला मैदान के भीतर बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कर दिया गया था, जहां बैंकेट हॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं।
मेयर ने साफ किया कि किसी भी धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया गया और केवल अवैध निर्माण हटाया गया है। कार्रवाई रात में किए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि दिन या रात का सवाल नहीं, बल्कि आदेश का पालन करना जरूरी था।
वक्फ बोर्ड और राजनीतिक प्रतिक्रिया
दिल्ली वक्फ बोर्ड और मस्जिद प्रबंधन समिति का कहना है कि ये पूरी जमीन वक्फ संपत्ति है और इस पर बुलडोजर चलाना गलत है। उन्होंने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 तय की है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने इस कार्रवाई की निंदा की है और इसे वक्फ भूमि पर अवैध कार्रवाई बताया है।
Katrina Kaif ने बेटे का नाम किया Reveal, Photo Share कर लिखा Special Message
Trump के खिलाफ Britain समेत एकजुट हुए Europe के 7 बड़े देश, Greenland पर सुना दिया बड़ा फैसला !
