India के एक प्लान से China-America रह जाएंगे सन्न !
ट्रेड डील को लेकर अमेरिका (America) के साथ बढ़ती तनातनी के बीच भारत (India ) ने अपनी रणनीति का प्लान-B पूरी तरह एक्टिव कर दिया है। इसी कड़ी में अगले हफ्ते भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement- FTA) घोषित होने की पूरी संभावना है। ये डील न सिर्फ भारत की वैश्विक ट्रेड पोजिशन को मजबूत करेगी, बल्कि चीन और अमेरिका (China-US), दोनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकती है।
भारत और EU के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस समझौते को 27 जनवरी 2026 को होने वाले इंडिया-EU शिखर सम्मेलन के दौरान आधिकारिक रूप से घोषित किया जा सकता है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन पहले ही इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दे चुकी हैं।
क्यों है India-EU FTA इतना बड़ा ?
ये FTA दुनिया की लगभग 2 अरब आबादी और वैश्विक GDP के करीब 25% हिस्से को जोड़ता है। समझौता मुख्य रूप से सामान, सेवाओं और ट्रेड नियमों पर आधारित होगा। हालांकि इसके लागू होने से पहले इसे EU परिषद और यूरोपीय संसद की मंजूरी लेनी होगी, जिसमें एक साल या उससे अधिक समय लग सकता है। ये भारत का करीब 9वां बड़ा FTA माना जा रहा है।

खास बात ये है कि इस FTA में भी कृषि और डेयरी सेक्टर को बाहर रखा जाएगा। EU चाहता है कि 95% से ज्यादा वस्तुओं पर टैरिफ हटाया जाए, जबकि भारत इसे करीब 90% तक सीमित रखना चाहता है।
India-EU ट्रेड: मौजूदा स्थिति और भविष्य
वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और EU के बीच करीब 11.8 लाख करोड़ रुपये (136.5 अरब डॉलर) का व्यापार हुआ।
- भारत का एक्सपोर्ट: 8 अरब डॉलर
- इंपोर्ट:7 अरब डॉलर
FTA के बाद भारत का एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में ये कारोबार 136 अरब डॉलर से बढ़कर 200–250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
यूरोप में 450 मिलियन से ज्यादा उपभोक्ता रहते हैं और ये करीब 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला बाजार है। FTA के जरिए भारतीय उत्पादों को इस विशाल बाजार में कम या बिना टैरिफ के एंट्री मिलेगी।
एक्सपोर्ट में आएगी जबरदस्त तेजी
EU दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक है। FTA के बाद भारतीय उत्पादों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी घटेगी या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
इससे खासतौर पर इन सेक्टर्स को बड़ा फायदा मिलेगा:
- टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट
- फार्मा और मेडिकल प्रोडक्ट्स
- चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी
- आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज
- मशीनरी और मैन्युफैक्चरिंग
- डिफेंस इक्विपमेंट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोप अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत से डिफेंस और हथियार सप्लाई की ओर भी देख रहा है, जिससे भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट बढ़ सकता है।
निवेश, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
FTA के बाद यूरोप से कम लागत वाला रॉ-मैटेरियल भारत आ सकेगा, जिससे यहां मैन्युफैक्चरिंग सस्ती होगी। इसके साथ ही
- बड़े स्तर परविदेशी निवेश (FDI) आएगा
- नई फैक्ट्रियां और इंडस्ट्रियल यूनिट्स खुलेंगी
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफरआसान होगा
- स्टार्टअप इकोसिस्टम को यूरोपीय निवेश से मजबूती मिलेगी
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फिलहाल EU में औसत टैरिफ करीब 3.8% है, जबकि गारमेंट्स और ज्वेलरी पर ये 10% तक जाता है। FTA के बाद ये टैरिफ घटने से भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
EU को क्या मिलेगा इस डील से?
FTA के जरिए यूरोपीय देशों को भारत के तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। अभी EU से भारत आने वाले उत्पादों पर औसतन 9.3% टैरिफ लगता है। समझौते के बाद
- ऑटोमोबाइल
- मशीनरी
- एयरक्राफ्ट
- केमिकल्स
- हाई-एंड टेक्नोलॉजी और निवेश
जैसे सेक्टर्स में व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
चीन पर निर्भरता घटाने का प्लान
ये डील EU और भारत—दोनों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। भारत यूरोप के लिए एक भरोसेमंद सप्लाई-चेन पार्टनर बन सकता है। खासकर,
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
- रिन्यूएबल एनर्जी
- ग्रीन हाइड्रोजन
जैसे सेक्टर्स में नई फंडिंग और साझेदारी के अवसर बढ़ेंगे।
अमेरिकी दबाव और धीमी ग्रोथ से जूझ रहे यूरोप के लिए भारत एक ऐसा बाजार है, जहां वे लंबे समय के लिए दांव लगा सकते हैं। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत, EU के लिए एक मजबूत और स्थिर विकल्प बनकर उभर रहा है।
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