Iran का कड़ा प्रहार…बैकफुट पर Trump !
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के रुख में नरमी देखने को मिल रही है। ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर लगातार हमलों के बाद अब अमेरिका ने संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत की संभावना जताई है। जंग के करीब दसवें दिन ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर शर्तें अनुकूल रहीं तो ईरान के साथ समझौते पर बातचीत हो सकती है।

एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेता बातचीत के लिए लगातार संपर्क कर रहे हैं और अमेरिका को बातचीत से कोई परहेज नहीं है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान किस तरह की शर्तों पर वार्ता के लिए तैयार होता है।
रूस, चीन और फ्रांस ने की सीजफायर की पहल
मौजूदा हालात में कई वैश्विक ताकतें युद्ध को रोकने की कोशिश कर रही हैं। खबरों के मुताबिक रूस, चीन और फ्रांस जैसे देशों ने भी युद्धविराम की पहल की है। ऐसे समय में ट्रंप का बातचीत के लिए तैयार होना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Trump को सलाहकारों ने भी सुझाया समझौते का रास्ता
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी प्रशासन के कुछ सलाहकारों ने भी ट्रंप को युद्ध लंबा खिंचने से होने वाले नुकसान के बारे में आगाह किया है। उनका कहना है कि अगर संघर्ष लंबा चला तो इसका आर्थिक और रणनीतिक असर अमेरिका पर पड़ सकता है।

खुफिया रिपोर्टों में ये भी कहा गया है कि ईरान में तख्तापलट की संभावना फिलहाल बेहद कम है, क्योंकि वहां की जनता इसके लिए तैयार नहीं दिख रही।
Trump ने हमले को बताया सही फैसला
इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान पर किए गए अमेरिकी हमलों को सही ठहराया। उनका कहना था कि अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान ईरान टालमटोल कर रहा था और परमाणु हथियारों की तैयारी कर रहा था। ऐसी स्थिति में सैन्य कार्रवाई को उन्होंने “जरूरी कदम” बताया।
अमेरिकी रक्षा मंत्री का कड़ा रुख
हालांकि बातचीत की संभावना के बीच अमेरिका का सैन्य रुख अब भी सख्त दिखाई दे रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा है कि ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए हमले जारी रहेंगे और जरूरत पड़ने पर और मजबूत कार्रवाई की जाएगी।
ईरान की ओर से तीखी चेतावनी
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव Ali Larijani ने ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान बाहरी दबाव से डरने वाला नहीं है और किसी भी धमकी का जवाब देने के लिए तैयार है।

लारीजानी ने ये भी दावा किया कि ईरान के हमलों में कुछ अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, हालांकि अमेरिका ने इन दावों को खारिज किया है।
तेल के बाजार पर भी पड़ा असर
मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक समय 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
ईरान द्वारा Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही रोकने की कोशिश ने भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का व्यापार इसी रास्ते से होता है।
Trump का दावा – युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा
ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि ये संघर्ष लंबा नहीं चलेगा और जल्द ही किसी न किसी समझौते के जरिए हालात सामान्य हो सकते हैं। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक बातचीत से इस संघर्ष को रोका जा सकेगा या हालात और गंभीर रूप ले सकते हैं।
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