Abhay Chautala criticized the government. INLD के National President अभय सिंह चौटाला ने Farmers की बारिश से खराब हुई फसल को लेकर State government पर जमकर हमला बोला। यमुनानगर में पूर्व विधायक दिलबाग सिंह के कार्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद Abhay Chautala ने प्रदेश सरकार पर जुबानी हमला बोला। अभय ने कहा कि Government portal पर करीब 31 लाख एकड़ भूमि को नुकसान ग्रस्त दर्शाया गया है, जहां आज भी कई स्थानों पर पानी भरा हुआ है या फिर फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। इस कारण किसानों की एक फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई, वहीं अगली फसल की बुआई भी नहीं हो पाई।
अभय चौटाला ने कहा कि दुख की बात यह है कि किसानों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। सरकार ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान देने के बजाय प्रभावित किसानों को खाद और बीज जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित कर दिया। आज भी हरियाणा में लाखों एकड़ जमीन ऐसी है, जहां बारिश का पानी खड़ा है, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
अभय चौटाला ने आरोप लगाया कि बारिश के कारण कई क्षेत्रों में धान की फसल की गुणवत्ता खराब हो गई। जब किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंचे तो उनकी धान की खरीद नहीं की गई। इसके बाद धान घोटाले का मामला सामने आया। उन्होंने कहा कि बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश से मोटा धान लाकर उसे हरियाणा की मंडियों में 500 से 700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेचा गया। जानकारी के अनुसार हजारों ट्रक सहारनपुर बॉर्डर पर पकड़े भी गए, लेकिन बाद में फर्जी गेट पास बनाकर उन्हें मंडियों में बेच दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि हजारों करोड़ रुपये के इस घोटाले की भनक सरकार को क्यों नहीं लगी ?

चौटाला ने कहा कि सरकारी संरक्षण के बिना इस स्तर का घोटाला संभव नहीं है। यह धान बाहर से लाकर यहां बेचा गया और इसमें से पैसा ऊपर तक पहुंचा। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार केवल दिखावे के लिए कुछ लोगों पर कार्रवाई करेगी और बाद में उन्हें छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब सरकार बदलती है तो मुद्दे बदल जाते हैं, लेकिन हर बार किसानों को ही मोहरा बनाया जाता है। सरकार गन्ने के भाव में 10 रुपये की बढ़ोतरी को बड़ी उपलब्धि बता रही है, जबकि मजदूरी की लागत 300 रुपये से बढ़कर 700 रुपये तक पहुंच चुकी है। महंगाई के इस दौर में किसान की लागत कई गुना बढ़ गई है।
अभय चौटाला ने कहा कि किसान के बिना समाज अधूरा है। यदि किसान खेतों में फसल नहीं उगाएगा तो लोगों को अनाज कहां से मिलेगा। इसलिए किसान का मुद्दा पूरे देश का मुद्दा है। उन्होंने बताया कि इन सभी विषयों पर विधानसभा में अलग-अलग कॉलिंग अटेंशन दी गई है। साथ ही स्टेडियमों में लगे स्टील के पोलों के रखरखाव में लापरवाही से हुए नुकसान पर भी चर्चा की मांग की गई है। उन्होंने स्पीकर से उम्मीद जताई कि यह प्रदेश की जनता की आवाज है और इस पर सदन में अवश्य चर्चा कराई जाएगी।
