Firozabad district hospital में यूपी स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत सामने आई है। घंटों लाइन में खड़े मरीज सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। एक्सरे मशीनें बंद पड़ी हैं और स्वास्थ्य मंत्री के वादे सिर्फ पोस्टर में चमक रहे हैं। पढ़िए खबरीलाल.डिजिटल पर
Firozabad district hospital : सरकारी एक्सरे से ज्यादा बड़ा यहां सब्र का टेस्ट होता है!
यूपी सरकार के स्वास्थ्य महकमे के बड़े-बड़े दावे टीवी पर खूब चमकते हैं — “बेहतर इलाज, बेहतरीन सुविधा, मरीजों को इंतजार नहीं!” लेकिन फिरोजाबाद जिला अस्पताल में सोमवार को इस दावे का एक्सरे सबके सामने हो गया — वो भी बिना मशीन के!
यहां मशीन भले चालू रहे न रहे, लेकिन सरकार के वादे फुल चार्ज रहते हैं। अस्पताल में मरीज लाइन में घंटों खड़े हैं — धूप में पिघलते हुए, पर्ची हाथ में लेकर खुद को दिलासा देते हुए कि अब तो नंबर आएगा… अब तो आएगा! लेकिन नंबर आता नहीं, और मरीज को समझ आता है कि असली इलाज बीमारी का नहीं — सरकार के दावे का होना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री जी! टीवी से बाहर भी देखिए Firozabad district hospital
कागजों में यूपी की हेल्थ सर्विसेस डबल इंजन से दौड़ रही हैं — नए अस्पताल, नई मशीनें, नए डॉक्टर। लेकिन जमीनी सच्चाई यही है कि मशीन भले न्यू मॉडल की हो — ऑपरेटर साहब अभी भी उसी पुराने ढर्रे पर हैं!
स्वास्थ्य मंत्री टीवी पर मुस्कुराकर कह देंगे — “हमने स्वास्थ्य सेवा गाँव-गाँव पहुंचा दी!” लेकिन फिरोजाबाद के जिला अस्पताल में वो सेवा इतनी पहुंची कि मरीज अपनी सांस रोककर मशीन चालू होने का इंतजार कर रहा है।
यहां बीमारी से ज्यादा सिस्टम मार डालता है
सोमवार को शिवशंकर सांस उखाड़ते हुए लाइन में खड़े थे — कहते हैं कि डॉक्टर ने कहा एक्सरे कराओ, अब मशीन कह रही है लाइन में खड़े रहो! हेमलता शर्मा सुबह 9 बजे से पर्ची पकड़े खड़ी थीं — कमर में दर्द लेकर आई थीं, अब सरकारी कुर्सियों की तरह उनकी कमर सीधी हो गई, दर्द वहीं का वहीं।
रेनू देवी ढाई साल के बच्चे को गोद में लिए घंटों खड़ी हैं — बच्चा भूखा है, गर्मी से बेहाल है, लेकिन अस्पताल का सिस्टम सर्दियों की रजाई बना बैठा है — न हिलेगा, न मिलेगा।
सरकारी दावे: मरीज मरे या बचे, बजट कटे न कटे Firozabad district hospital
सीएमएस साहब ने कह दिया — “पर्ची लो, लाइन में लगो, कोई कर्मचारी बदतमीजी करे तो शिकायत करो।” वाह डॉक्टर साहब! आप इलाज से ज्यादा शिकायत केंद्र चला रहे हैं क्या? उधर स्वास्थ्य मंत्री भी चैनलों पर कहेंगे — सब बेहतर है! और मरीज बोलेगा — सरकारी अस्पताल में सब ठहरा है!
यूपी सरकार बजट बढ़ा रही है, योजनाएं गिना रही है — लेकिन जमीनी हकीकत में जिला अस्पताल में मरीज को धूप में खड़ा रखकर एक्सरे मशीन नींद पूरी कर रही है!
आम आदमी बोले: नेता जी, पहले मशीनों का इलाज कराओ!
यहां सबको इलाज से ज्यादा इंतजार सिखाया जा रहा है — लाइन में खड़े रहो, मशीन बंद पड़ी रहे, ऑपरेटर गुमशुदा हो जाए, मरीज सिस्टम को कोसता रहे — और सरकार अगले चुनाव में कह दे स्वास्थ्य क्रांति आ गई!
शिवशंकर जैसे सैकड़ों मरीज हैं जिनका इलाज बीमारी से नहीं, सरकारी ढुलमुल व्यवस्था से होता है। मिशन स्वास्थ्य के बोर्ड लगवाकर नेता जी खुश हैं, लेकिन अस्पताल के बाहर मरीजों की लाइन रोज गवाही देती है कि मिशन सिर्फ कागजों में है, जमीनी सच्चाई सिर्फ लाइन में!
