Iran की हिटलिस्ट से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा
अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच Iran ने पहली बार उन नेताओं की कथित “हिटलिस्ट” जारी की है, जिन्हें वह अपना प्रमुख दुश्मन मानता है। अब तक इस तरह की सूचियां इजराइल की खुफिया एजेंसी की ओर से सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार पहल ईरान की तरफ से की गई है। ये घटनाक्रम मध्य पूर्व की राजनीति में नए भू-राजनीतिक संकेत दे रहा है।

Iran की हिटलिस्ट में कौन-कौन शामिल ?
ईरान की सरकारी मीडिया में जारी इस सूची में इजराइल के शीर्ष नेताओं और सैन्य अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। सूची में सबसे ऊपर इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का नाम रखा गया है।
इसके अलावा जिन प्रमुख नामों का जिक्र किया गया है, उनमें
- David Barnea (मोसाद चीफ)
- Israel Katz (रक्षा मंत्री)
- Eyal Zamir (आईडीएफ चीफ)
- Tomer Bar (एयरफोर्स चीफ)
- Shlomi Binder (मिलिट्री इंटेलिजेंस चीफ)
- Itzik Cohen (ऑपरेशन चीफ) के नाम शामिल है
हालांकि Iran ने ये स्पष्ट नहीं किया है कि इन व्यक्तियों को कब और किस तरह निशाना बनाया जाएगा।
नेतन्याहू के अमेरिका दौरे के बाद बढ़ा तनाव
ये हिटलिस्ट उस समय जारी की गई जब Benjamin Netanyahu हाल ही में अमेरिका दौरे पर गए थे। उन्होंने वॉशिंगटन में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात की।

मुलाकात के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका, ईरान के साथ बातचीत का प्रयास करेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पहले बातचीत होगी, उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस घटनाक्रम के तुरंत बाद ईरान की ओर से ये सूची जारी होना वैश्विक राजनीति में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
जून 2025 का ऑपरेशन “Rising Lion”
तनाव की जड़ें जून 2025 में हुए इजराइली सैन्य अभियान से जुड़ी हैं। इज़रायल ने Iran के खिलाफ “Operation Rising Lion” नाम से ऑपरेशन चलाया था।
इस ऑपरेशन का उद्देश्य Iran के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार्रवाई में कई ईरानी परमाणु वैज्ञानिक और सैन्य अधिकारी मारे गए थे।
मारे गए प्रमुख अधिकारियों में शामिल थे:
- Hossein Salami (IRGC चीफ)
- Mohammad Bagheri (चीफ ऑफ स्टाफ)
- Amir Ali Hajizadeh (IRGC एयर फोर्स चीफ)
इसी ऑपरेशन के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया।
क्या Middle East में युद्ध होगा ?
Iran द्वारा हिटलिस्ट जारी करना सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक कड़ा संदेश भी माना जा रहा है। इससे Middle East में पहले से जारी अस्थिरता और गहरी हो सकती है।
Iran, इज़रायल और अमेरिका के बीच चरम पर तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते, तो क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ सकती है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी बयानबाजी आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार और सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है। ईरान द्वारा पहली बार हिटलिस्ट जारी करना एक ऐतिहासिक और गंभीर घटनाक्रम है। ये कदम इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को और स्पष्ट करता है। आने वाले समय में ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये केवल राजनीतिक दबाव की रणनीति है या फिर क्षेत्र में बड़े संघर्ष की भूमिका तैयार हो रही है।
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