Iran संकट के लिए खामेनेई ने Trump को ठहराया जिम्मेदार !
ईरान (Iran) में हाल ही में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ईरानी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया है कि इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक 5,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में लगभग 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। ये बयान ऐसे समय में आया है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की स्थिति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

सरकारी अधिकारी के अनुसार, इन मौतों के लिए आतंकवादी और हथियारबंद उपद्रवी जिम्मेदार हैं, जिन्हें विदेशों से समर्थन और हथियार मिले थे। सरकार का दावा है कि इन हिंसक गतिविधियों में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई।
खामेनेई ने ट्रंप को ठहराया जिम्मेदार
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई, ईरान में हुए हालिया हिंसक प्रदर्शन और हिंसक प्रदर्शन के दौरान हुई जान माल की हानि के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं. खामेनेई का स्पष्ट कहना है कि ट्रंप ने खुलकर ईरान में हिंसा को भड़काया है. साथ ही साथ खामेनेई ने चेतावनी दी है ईरान के खिलाफ साज़िश रचने वाल हर एक दोषी को सजा दी जाएगी, चाहे वो कोई ईरानी हो या फिर कोई विदेशी शख्स।

कुर्द इलाकों में सबसे ज्यादा हिंसा
ईरान के उत्तर-पश्चिमी कुर्द बहुल इलाकों में सबसे अधिक हिंसा और झड़पें दर्ज की गईं। ये क्षेत्र पहले भी अशांति और अलगाववादी गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है। अधिकारी का कहना है कि जब भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होते हैं, तो कुर्द इलाकों में हालात सबसे ज्यादा बिगड़ते हैं।
क्या Iran में मौत का आंकड़ा और बढ़ेगा ?
ईरानी अधिकारी ने ये भी कहा कि मृतकों की संख्या में अब बहुत अधिक वृद्धि की संभावना नहीं है। सरकार का आरोप है कि सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को इजराइल और विदेशों में सक्रिय हथियारबंद समूहों से समर्थन मिला।

Iran संकट पर मानवाधिकार संगठनों के अलग आंकड़े
दूसरी ओर, अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA का कहना है कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 3,308 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4,382 मामलों की जांच अभी जारी है। संगठन ने ये भी दावा किया है कि इन प्रदर्शनों के दौरान 24,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया।
नॉर्वे स्थित ईरानी कुर्द मानवाधिकार संगठन ‘हेंगाव’ ने भी पुष्टि की है कि सबसे हिंसक झड़पें कुर्द इलाकों में ही हुई थीं।

Iran में 19 दिनों की हिंसा में भारी नुकसान
लगभग 19 दिनों तक चले इन विरोध प्रदर्शनों के बाद फिलहाल हालात शांत बताए जा रहे हैं, लेकिन इस दौरान देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- 30 प्रांतों में करीब 250 मस्जिदें और 20 धार्मिक केंद्र क्षतिग्रस्त हुए
- 182 एम्बुलेंस और फायर डिपार्टमेंट के उपकरणों को नुकसान, कुल क्षति लगभग 3 मिलियन डॉलर
- 317 बैंक शाखाएं पूरी तरह नष्ट, जबकि 4,700 बैंकों को आंशिक नुकसान
- 1,400 एटीएम क्षतिग्रस्त, जिनमें से 250 पूरी तरह बंद
- बिजली क्षेत्र को 6 मिलियन डॉलर का नुकसान
- 265 स्कूल और शिक्षा केंद्र, 3 बड़ी लाइब्रेरी, 8 सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थल और 4 सिनेमाघर क्षतिग्रस्त
ईरान में हुए ये विरोध प्रदर्शन न केवल मानव जीवन के लिहाज से, बल्कि देश की धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना के लिए भी बेहद विनाशकारी साबित हुए हैं। सरकार और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों में अंतर जरूर है, लेकिन ये स्पष्ट है कि ये संकट ईरान के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर संकट में से एक है।
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