Iran में बढ़ते तनाव पर व्हाइट हाउस के नए संकेत, US फिलहाल युद्ध के मूड में नहीं !
ईरान (Iran) और अमेरिका (America) के बीच जारी तनाव के बीच व्हाइट हाउस से एक अहम अपडेट सामने आया है। हालिया घटनाक्रम से संकेत मिलते हैं कि अमेरिका इस समय ईरान के खिलाफ सीधे युद्ध के लिए तैयार नहीं है। 14 जनवरी को हुई एक इमरजेंसी मीटिंग में अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संभावित हमले के खतरों और उसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई।
Iran पर इमरजेंसी मीटिंग में क्या हुआ?
सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि अगर ईरान पर हमला किया गया और उससे तत्काल समाधान नहीं निकला, तो अमेरिका को लंबी और जटिल जंग में फंसना पड़ सकता है। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि ऐसा संघर्ष न केवल रणनीतिक रूप से कठिन होगा, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक रूप से भी अमेरिका के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

ट्रंप की “एक स्ट्राइक” की शर्त
बैठक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सुरक्षा टीम से सवाल किया कि क्या ऐसा कोई एक्शन प्लान मौजूद है, जिससे सिर्फ एक ही हमले में ईरान से जुड़ा पूरा मसला सुलझाया जा सके। हालांकि, सुरक्षा सलाहकार और सैन्य अधिकारी इस तरह की किसी ठोस गारंटी देने में असमर्थ रहे। ट्रंप की प्राथमिकता किसी बड़े और लंबे युद्ध से बचने की बताई जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी संकेत दिया कि हालात पर नजर रखी जा रही है और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।

वेनेजुएला की तरह Iran के खिलाफ ऑपरेशन की तैयारी
जानकारों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की कोशिश वेनेजुएला जैसे “साइलेंट ऑपरेशन” की तर्ज पर समाधान खोजने की है, जहां बिना बड़े सैन्य टकराव के सत्ता समीकरण बदले गए थे। हालांकि, ईरान जैसे मजबूत और प्रभावशाली देश के मामले में ऐसा मॉडल लागू करना आसान नहीं माना जा रहा।
कतर से सैनिकों की वापसी की खबर
इसी दिन एक और अहम खबर सामने आई, जब कतर स्थित अल-उदीद मिलिट्री बेस से कुछ अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाए जाने की जानकारी मिली। समाचार एजेंसियों के मुताबिक, इस कदम के पीछे की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन इसे क्षेत्रीय रणनीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात ये दर्शाते हैं कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ सीधे युद्ध की बजाय कूटनीतिक और सीमित विकल्पों पर विचार कर रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख और अंतरराष्ट्रीय दबाव इस तनाव की दिशा तय करेंगे।
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