राजधानी की सड़कों मौत का साया बनकर घूमता रहा ‘शैतान’… 7 साल तक किया मासूमों का शिकार. अपहरण, दुष्कर्म और मर्डर की वारदातों को दिया अंजाम. अब सलाखों के पीछे ‘हैवान‘
New Delhi : देश की राजधानी दिल्ली… यहां न तो गुनाहों की कोई कमी है और न ही गुनहगारों की… एक से बढ़कर एक सनकी भरे पड़े हैं शहर में. ऐसा ही एक सनकी था रविन्द्र कुमार… जिसे आज की दुनिया सीरियल किलर Ravinder Kumar के नाम से जानती है. इस दरिंदे ने एक नहीं, दो नहीं बल्कि पूरी 30 बच्चों की जिंदगी से खेला और उन्हे अपनी हवस का शिकार बनाया… इतने पर भी जब शैतान का मन नहीं भरा, तो वो ले लेता था उन मासूमों की जान.
सात साल में 30 बच्चों का क़त्ल
करीब 30 बच्चों की जिंदगी से खेलने वाला Serial Killer Ravinder Kumar… उस समय नाबालिग था जब उसने बच्चों के साथ खून की होली खेलनी शुरू की थी. जब पहली बार उसने किसी बच्चे को अपनी हवस का शिकार बनाया था, अगर तभी कोई शैतान को पहचान लेता तो ये मौत का सिलसिला वहीं थम जाता. लेकिन… कहते हैं रविन्द्र ने 7 साल में 30 बच्चों को अपना निशाना बनाया. उनके साथ का दुष्कर्म किया और फिर, उन्हें मार डाला. उसने ज्यादातर वारदातों को Delhi-NCR और UP West के इलाकों में अंजाम दिया था.
मजदूरों के बच्चों को बनाता था निशाना

वो इतना शातिर था कि सिर्फ गरीब परिवर के बच्चों को ही अपना Target बनाता था. वो ऐसे बच्चों का शिकार करता था जिनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर होते थे. इसकी वजह ये थी कि लापता होने वाले बच्चों के मजदूरी करने वाले माता-पिता एक बार पुलिस के पास शिकायत लेकर जाते थे और उसके बाद रोज़ी रोटी कमाने की जुगद में व्यस्त हो जाते थे. बच्चे को तो खो चुके थे, रोज़ी रोटी से भी जाते. वो बेचारे पुलिस वालों से दोबारा मिल ही नहीं पाते थे, और इसी बात का फायदा दरिंदा रविंदर उठाता था. वो सनकी बच्चों का कत्लेआम करके भी खुली हवा में बिंदास घूमता रहता था.
किसी को गाड़ दिया, किसी को नाले में फेंका
दरिंदे ने हवस का शिकार बनाने के बाद किसी बच्चे को गाड़ दिया तो किसी को नाले में फेंक दिया. साल दर साल बीतते चले गए और उसकी सनक बढ़ती चली गई. साथ ही बढ़ता चला गया उसकी दरिंदगी के शिकार होने वाले बच्चों का आंकड़ा. Ravinder Kumar नाबालिग था जब उसने पहली बार किसी बच्चे को अपनी हवस का शिकार बनाया… धीरे-धीरे शिकार होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ती रही, लेकिन किसी को उसके खतरनाक इरादों की भनक तक नहीं लगी. जब पहली बार वो पुलिस के शिकंजे में आया तो ऐसा खुलासा किया जिसे सुनकर दिल्ली पुलिस के भी होश फाख्ता हो गए.
“मैंने बच्चों का अपहरण किया… दुष्कर्म किया और फिर उन्हें मार डाला. यहां तक कि डेड बॉडी के साथ भी कुकर्म किया… मुझे इसमें बहुत मजा आता था…”
ये कबूलनामा है उस गुनाहे अजीम का जो दिल्ली के सबसे बड़े शैतान ने पुलिस के सामने किया था. साल 2008 की बात है… उस वक्त रविंदर UP के कासगंज से दिल्ली आया था… तब उसकी उम्र 18 साल थी. उसके पिता प्लम्बर थे और मां लोगों के घरों में काम करती थी. लिहाज़ा सारा बचपन गरीबी में गुज़रा था… लेकिन दिल्ली आने के बाद वो बड़े-बड़े सपने देखने लगा था. वो बड़े शहर वालों की तरह अपनी जिंदगी को बदलना चाहता था. रविन्द्र धीरे-धीरे शराब और ड्रग्स का आदि हो गया था. इसी के साथ उसे Porn Video देखने की लत लग चुकी थी.
रोज़ रात शराब पीता और शिकार पर निकल जाता
पुलिस के सामने उसने खुद कबूला था कि वो हर शाम शराब पीता या ड्रग्स लेता था… और फिर अपने टारगेट यानी नाबालिग बच्चों की तलाश में निकल जाता था. एक बार तो उस दरिंदे को शिकार न मिलने पर वो 40 किमी तक पैदल चला गया था. सबसे पहले उसने 2008 में घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था. ये वही साल है जब वो कासगंज से दिल्ली आया था. यानी बड़े शहर आते ही उसकी नीयत बिगड़ चुकी थी. शहर आते उसके अंदर का शैतान जाग चुका था. बुरी आदतें तो उसको लग ही चुकी थीं… उसी के चलते उसने पहले ही साल एक बच्ची को अपना निशाना बनाया.
टॉफी का लालच देकर करता था अपराध

पुलिस को दिए बयान में दरिंदे ने बताया कि साल 2008 में उसने पहली बार एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उसे मार डाला था. पहली बार अपराध करने पर जब वो पकड़ा नहीं गया तो उसके हौंसले और बढ़ गए. उस शैतान ही हिम्मत बढ़ती चली गई और फिर ये उसका रोज का सिलसिला बन गया. वो रोज शाम निकलता और ज्यादातर 6 से 12 साल की बच्चियों की खोज शुरू करता. Ravinder ने अपने इकबालिया बयान में पुलिस को बताया कि वह बच्चों को पास बुलाने के लिए 10 रुपए के नोट या फिर टॉफी का लालच देता था. फिर उन्हें पकड़कर किसी सुनसान इलाके में ले जाता और उनके साथ बलात्कार करता था. इतने पर भी जब दरिंदे का मन नहीं भरता था तो वो उनकी हत्या कर देता था. रविन्द्र का ये बयान खुद पुलिस वालों के भी होश उड़ाने वाला था. उसकी एक-एक बात और वारदात दिल दहला देने वाली थी.
पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ा और छूट गया
सात साल में करीब 30 बच्चों को मौत के घाट उतार चुका दरिंदा Ravinder साल 2014 में पहली बार पुलिस के हत्थे चढ़ा… एक बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था. लेकिन सबूतों की कमी के चलते अदालत ने पापी को छोड़ दिया. इसके बाद वो 2015 में 6 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या केस में दिल्ली के रोहिणी से पकड़ा गया. इस बार पुलिस के पास पुख्ता सबूत थे. मजबूत चार्जशीट बनाई जिसके बाद मई 2023 में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी. तब से वो सलाखों के पीछे हैं.
रोहिणी कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट केस माना
Ravinder Kumar एक सामान्य और गरीब परिवार से जरूर था लेकिन उसने जिस तरह का गुनाह किया था वो किसी कीमत पर माफी लायक नहीं था. उसने जिन बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया, वो भी बेहद गरीब परिवार की थी… ज्यादातर बच्चियां सड़क किनारे फुटपाथ पर जीवन जीने वाले परिवारों की थी. रविंदर को ये सजा अतिरिक्त जिला न्यायाधीश Sunil Kumar की कोर्ट ने और उन्होने इसे रेयरेस्ट केस माना. पुलिस पूछताछ के दौरान रविन्द्र ने खुद साल 2008 से लेकर 2015 तक करीब 30 बच्चों से दरिंदगी की बात कबूल की थी.
कैसे चढ़ी बच्चियों से हैवानियत की सनक?

पकड़े जाने के बाद शैतान ने पुलिस को बताया कि वो 2008 से पहले खूब भूतिया फिल्में देखता था… उसी दौरान उसने एक English Film देखी, जिसमें तीन लोग बच्चों की हत्या करके उनसे कुकर्म और दुष्कर्म करते थे… इस फिल्म ने रविन्द्र के दिमाग पर गहरा असर डाल दिया. अब वो भी ऐसा करने की सोचना लगा था… ये फिल्म देखने के बाद वह शराब पीने लगा और उसके बाद सूखा नशा करने लगा. कासगंज जैसे छोटे कस्बे में वो कोई भी हरकत करता तो पकड़ा जाता, इसीलिए काम का बहाना बनाकर वो दिल्ली आ गया और शिकार तलाशने लगा.
2012 में पहली बार पकड़ा गया
Ravinder Kumar के केस की छानबीन कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि साल 2012 में उसका परिवार दिल्ली के बेगमपुर शिफ्ट हुआ था… 2008 से 2012 तक वो लगतातर Crime करता जा रहा था, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लग रही थी. और ना ही वो पकड़ा जा रहा था. इसी बेफिक्री में साल 2014 में रविन्द्र ने बेगमपुर इलाके में एक बच्ची को हवस का शिकार बनाया. फिर उसकी गला रेतकर नाले में फेंक दिया… उसने सोचा कि बच्ची मर गई है, लेकिन बच्ची की किस्मत अच्छी थी और वो बच गई. एक बीट कांस्टेलब ने बच्ची को नाले में पड़े देख लिया और बचा लिया… इस केस के सिलसिले में मुकदमा दर्ज हुआ और रविन्द्र को गिरफ्तार कर लिया गया… जुलाई 2015 तक आरोपी रविंद्र जेल में रहा और सबूतों के अभाव में छूट गया.
पड़ोसी ने दी जमानत, उसे ही मारने को दौड़ा
2015 में Ravinder के पड़ोसी ने उसकी जमानत कराई थी… बाद में वो उसी पड़ोसी के बेटे की खून का प्यासा हो गया. दरअसल उसकी पड़ोस के लड़के सन्नी से दोस्ती थी. सन्नी के पिता ही 2015 के केस में जमानती बने थे. जेल से आने के बाद रविन्द्र का सन्नी के घर आना-जाना शुरू हुआ… इसकी वजह रविन्द्र की मां थी. बताया गया कि उसकी मां के साथ सन्नी के नाजायज संबंध थे. एक बार रविन्द्र ने अपनी मां को सन्नी के साथ आपत्तिजनक हालात में देख भी लिया था. इसके बाद वो सन्नी की जान का दुश्मन बन गया. 13 जुलाई 2015 को रविन्द्र ने बहाने से सन्नी को एक सुनसान इलाके में बुलाया और शराब पीने को कहा. लेकिन सन्नी ने शराब नहीं पी. इसके बाद नशे में Ravinder ने सन्नी को बुरी तरह मारा, लेकिन मौका पाकर सन्नी वहां से बच निकला.
लाश के साथ रेप के बाद फेंके पड़ोसी के दस्तावेज

Ravinder ने सन्नी के कुछ दस्तावेज अपने पास रख लिए थे… रात भर नशे की हालत में वो सन्नी को ढूंढता रहा और बेगमपुर इलाके में पहुंच गया… और उसी रात करीब डेढ़ बजे उसने एक बच्ची को हवस का शिकार बनाया. जब वह बच्ची के साथ दुष्कर्म कर रहा था तो बच्ची चिल्लाने लगी. गुस्से में आकर दरिंदे ने बच्ची की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी. और उसके बाद भी सनकी लाश के साथ दुष्कर्म करता रहा. फिर उसकी लाश के पास सन्नी के डॉक्यूमेंट फेंक कर उसे फंसाने की साजिश रची.
लाश के पास मिले दस्तावेजों से पकड़ा गया दरिंदा
बच्ची की गुमशुदगी को लेकर बेगमपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई… पुलिस ने बच्ची को ढूंढना शुरू किया तो बच्ची की लाश मिली. घटनास्थल पर मिले सन्नी के दस्तावेज मिले. पुलिस सन्नी तक पहुंची तो उसने रविन्द्र का सारा कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया. जिसके बाद पुलिस ने बिना वक्त गंवाए दिल्ली के सबसे बड़े सीरियल किलर को उठाया और गिरफ्तारी के बाद उसे रोहिणी कोर्ट में पेश किया. कोर्ट ने रविन्द्र को दोषी करार दिया… और तभी से यानी साल 2015 से ये साइको किलर और मासूम बच्चियों के हत्यारा जेल में बंद है… इसी दौरान पूछताछ में उसने ये बताया कि 2008 से लेकर 15 तक उसने 30 से ज्यादा बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया… जांच के दौरान पता लगा कि इसमें से 14 मामले दिल्ली के थे. विशेष लोक अभियोजक ने दोषी Ravinder Kumar को मृत्यु दंड देने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे दो मामलों में 10 साल और उम्रकैद की सजा सुनाई है. दिल्ली के अलावा आरोपी ने फरीदाबाद, बहादुरगढ़, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी वारदातों को अंजाम दिया था.
