2026 का शानदार आगाज़
जब दुनिया के ज़्यादातर देश न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए घड़ी की सुइयों के आधी रात पर पहुंचने का इंतजार कर रहे होते हैं, तब कुछ खास जगहों पर 2026 की शुरुआत पहले ही हो चुकी होती है। भारत से करीब 9 घंटे पहले प्रशांत महासागर में बसे दो दूरदराज इलाकों किरिबाती का किरीतिमाती द्वीप और न्यूजीलैंड के चैथम आइलैंड में नए साल का आगाज हो गया है।
हर साल की तरह इस बार भी दुनिया में सबसे पहले 2026 का स्वागत किरिबाती के किरीतिमाती (Kiritimati) द्वीप ने किया। जैसे ही वहां घड़ी ने आधी रात का समय छुआ, लोगों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। इसके कुछ ही समय बाद न्यूजीलैंड के चैथम आइलैंड पर भी नए साल की खुशियां देखने को मिलीं।
किरिबाती: जहां सबसे पहले आता है नया साल 2026
किरिबाती प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है, जो हवाई द्वीपों के दक्षिण और ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में पड़ता है। ये देश 33 छोटे-बड़े कोरल द्वीपों (एटोल्स) से मिलकर बना है और लगभग 4,000 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।

किरिबाती को 1979 में ब्रिटेन से आज़ादी मिली थी और यहां की कुल आबादी लगभग 1.16 लाख है। भौगोलिक रूप से ये हवाई के क़रीब होने के बावजूद नया साल एक दिन पहले मनाता है। इसका कारण 1994 में किया गया टाइम ज़ोन बदलाव है, ताकि देश के सभी द्वीपों पर एक ही तारीख रहे। इसी वजह से किरीतिमाती को दुनिया में सबसे पहले 2026 का स्वागत करने वाला इलाका माना जाता है।
समुद्र से घिरा देश, 2026 का जश्न, भविष्य की चिंता
किरिबाती के कई द्वीप समुद्र तल से बेहद कम ऊंचाई पर बसे हैं। समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण यहां के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद स्थानीय लोग हर साल पूरे उत्साह और उम्मीद के साथ नए साल का स्वागत करते हैं। ये क्षेत्र दक्षिण प्रशांत का एक बड़ा मरीन रिज़र्व भी माना जाता है, जो इसकी प्राकृतिक अहमियत को और बढ़ाता है।
चैथम आइलैंड: छोटा द्वीप, खास जश्न
किरिबाती के बाद 2026 न्यूजीलैंड के चैथम आइलैंड पहुंचता है। यहां करीब 600 लोग रहते हैं। नए साल की पूर्व संध्या पर स्थानीय लोग होटल चैथम के बार में इकट्ठा होकर पुराने साल के आखिरी पल साझा करते हैं। होटल की मालकिन टोनी क्रून के अनुसार, युवा लोग देर रात तक जश्न मनाते हैं, जबकि बुज़ुर्ग जल्दी आराम करना पसंद करते हैं।
उनका कहना है कि इस द्वीप पर नया साल मनाना खास होता है, क्योंकि भले ही ये जगह दुनिया से कटी हुई लगे, लेकिन यहां के लोग एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
इस तरह, जब भारत और दुनिया के अधिकांश देश अभी इंतजार में होते हैं, तब प्रशांत महासागर के ये छोटे-से द्वीप सबसे पहले 2026 का स्वागत कर इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं।
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