‘मुस्लिम लड़के-लड़कियों ने नए साल का जश्न मनाया तो…”, मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन बरेलवी का भड़काऊ बयान. नए साल के जश्न को बताया ‘फूहड़ता‘. कहा ‘इस्लाम इजाजत नहीं देता‘
New Delhi : नए साल के जश्न से हम बस दो कदम ही दूर खड़े हैं… हर किसी ने अपने हिसाब से नए साल की पार्टी के इंतज़ाम भी कर लिए होंगे. लेकिन आपके नए साल के जश्न में खलल डालने के लिए भी कोई बहुत बेताब बैठा है. हम हात कर रहे हैं UP के बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की, जिन्होने नए साल से पहले एक अनोखा फतवा जारी किया है…
मौलाना बरेलवी का भड़काऊ बयान

Maulana Shahabuddin Razvi ने इस्लाम में नए साल का जश्न मनाने को नाजायज करार दिया है. साथ ही ये धमकी दी है कि जो भी मुस्लिम नौजवान या मुस्लिम लड़के-लड़कियां नए साल के जश्न में शामिल होंगे, वो शरीयत के नियमों के खिलाफ होंगे. मौलाना रिजवी का कहना है कि शरीयत में नाच गाना और फिजूलखर्ची को नाजायज माना गया है. साथ ही उन्होने तमाम मुस्लिम लोगों को New Year Party से दूर रहने की नसीहत दी है.
नए साल का जशन ‘फूहड़ता’-मौलाना
नए साल के जश्न से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का एक भड़काऊ बयान Social Media पर वायरल हो रहा है. उन्होंने मुसलमानों से New Year Party ना करने की नसीहत दी है. मौलाना के मुताबिक इस्लाम धर्म इसकी कतई इजाजत नहीं देता. ये पैसों की बर्बादी है. नए साल का जश्न फूहड़ता से कम नहीं.
मुस्लिम लड़के-लड़कियों से अपील

मौलाना ने कहा कि “इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक नया साल मोहर्रम के महीने से शुरू होता है… लेकिन यूरोपीय कल्चर के हिसाब से 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है. ये ईसाई समाज के लोगों के लिए होता है. 31 दिसंबर की रात में जश्न के नाम पर फूहड़ता होती है. हंगामा, शोर-शराबा, नाच-गाना किया जाता है. लोगों की फिजूलखर्ची होती है जो कि शरीयत-ए-इस्लामिया के मुताबिक गलत है. इसलिए मुस्लिम नौजवानों से अपील है कि वे इस जश्न में शामिल ना हों”.
मुसलमान युवकों को चेतावनी

इतना ही नहीं… मौलाना बरेलवी ने जश्न मनाने वाले मुस्लिम युवाओं को धमकी भी दी है. मौलाना ने कहा है कि अगर उन्हें पता चला कि मुस्लिम नौजवान कहीं पर New Year Party कर रहे हैं तो उलमा-ए-किराम इसपर सख्त एक्शन लेगा. मौलाना बरेलवी के मुताबिक कुछ मुस्लिम संगठन और नेता सूर्य नमस्कार, नदी, पेड़-पौधों जैसी चीजों की पूजा कर रहे हैं… इस्लाम में ये सब कुछ हराम माना जाता है. अब मौलाना साहब को कौन समझाए, ये 15वीं सदी नहीं बल्कि 21वीं शताब्दी है. आज का युवा हर वो काम करना चाहता है जो उसका मन कहता है. ये Yuva किसी के बहकावे में नहीं आता. अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीता है और अपनी आज़ादी के लिए किसी से भी लड़ सकता है.
