Bangladesh की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद घर वापसी… गिरफ्तारी से बचके भागे थे London. जानिए India के लिए कैसे है ये Good News?
Dhaka : पिछले 17 सालों से BNP के पोस्टर्स पर जिस शख्स का सिर्फ चेहरा दिखता रहा. बांग्लादेश की गली-गली में जिसकी रिकॉर्डेड आवाज गूंजती रही, वो Dhaka में वापस लौट आया है. हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश की Ex PM Khaleda Zia के बेटे और कभी देश की राजनीति में Dark Prince कहे जाने वाले Tarique Rahman की, जो पिछले दो दशकों से गुमनामी के साए में खोए थे.
6,314 दिनों बाद की घर वापसी

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष Tarique Rahman आज अपनी पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान और बेटी, बैरिस्टर जाइमा के साथ Dhaka पहुंचे हैं. वतन वापस लौटते ही रहमान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा और कहा, “6,314 दिनों के बाद बांग्लादेश में”. ये हिंसा से जूझ रहे Bangladesh और BNP के लिए एक निर्णायक क्षण है. रहमान की वापसी फरवरी में होने वाले अहम आम चुनावों से ठीक पहले हुई है, ऐसे चुनाव जो India की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद खास हैं. भारत के लिए Tarique Rahman की वापसी कई मायने रखती है… खासकर ऐसे वक्त में जब भारत समर्थक Awami League को चुनाव लड़ने से रोका जा चुका है और पूर्व पीएम खालिदा जिया अस्पताल में भर्ती हैं.
50 लाख लोगों ने किया स्वागत
लोकतंत्र के पैरोकार के रूप में खुद को स्थापित कर चुके Tarique Rahman ढाका भारी जनसमर्थन के साथ पहुंचे. एयरपोर्ट से अपने आवास तक निकाले गए Road Show में करीब 50 लाख पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए. हालांकि बांग्लादेश के कट्टरपंथी तत्व रहमान के इस शक्ति प्रदर्शन से खुश नहीं हैं. माना जा रहा है कि वो बोगुड़ा-6 (सदर) सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. चुनाव से पहले बीएनपी और जमात के बीच टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. गुरुवार को रहमान की वापसे के लिए यूसुफ सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. स्थानीय सूत्रों की मानें तो करीब 10 स्पेशल ट्रेनों से 3 लाख से ज्यादा बीएनपी समर्थक ढाका पहुंचे थे. बताया ये भी जा रहा है कि एयरपोर्ट पर ही करीब एक लाख लोग रहमान का स्वागत करने पहुंचे थे. तीन घंटे तक Tarique Rahman का रोडशो भी हुआ लेकिन पूर्व पीएम शेख हसीना के लेकर उन्होने एक शब्द नहीं कहा.
चौराहे पर खड़ा बांग्लादेश

इस वक्त Bangladesh एक चौराहे पर खड़ा है… अंतरिम मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में कट्टरपंथी इस्लामी तत्व खुलेआम घूम रहे हैं और भारत के खिलाफ जहर फैला रहे हैं. ऐसे में India की सबसे बड़ी चिंता जमात-ए-इस्लामी को लेकर है, जिसे Pakistan की ISI का मोहरा माना जाता है. Ex PM Sheikh Hasina सरकार की तरफ से बैन की गई ये पार्टी, पिछले साल उनके जाते ही दोबारा राजनीति में एक्टिव हो गई. हाल ही में हुए एक जनमत सर्वे में ऐसे इशारे में हैं कि तारिक रहमान की पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिल सकती हैं. वहीं कभी उसकी सहयोगी रही जमात-ए-इस्लामी, अब उसकी एड़ी पर सांस ले रही है. India की चिंता तब और बढ़ गई जब Dhaka University के Students Elections में जमात की छात्र इकाई ने चौंकाने वाली जीत दर्ज की.
BNP बनाएगी अगली सरकार?
ऐसे हालात में India की नजर में BNP पर आ टिकी है… जो बाकी पार्टियों के मुकाबले थोड़ी बेहतर और लोकतांत्रिक है, भले ही दोनों के बीच रिश्ते ऐतिहासिक रूप से तनावपूर्ण रहे हों. India को उम्मीद है कि Tarique Rahman की वापसी से उनकी अपनी पार्टी में जान आएगी और BNP देश में अगली सरकार बनाएगी.
भारत के लिए अच्छी खबर क्यों?

इन सबके बीच छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटीजन पार्टी ने आरोप लगाया है कि Bangladesh नेशनलिस्ट पार्टी, अवामी लीग के नेताओं को अपने पाले में ला रही है. Sheikh Hasina के कार्यकाल में बांग्लादेश ने भारत के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखे और चीन-पाकिस्तान के साथ दूरी. लेकिन यूनुस सरकार ने तख्तापलट करते ही हालात पूरी तरह बदल दिए और जाकर भारत के दुश्मनों की गोद में जाकर बैठ गए. बांग्लादेश कट्टरपंथी सोच के साथ आगे बढ़ता रहा और भारत से दूरी बनाता रहा. लेकिन अब अगर सत्ता परिवर्तन होता है और BNP सत्ता में आती है तो Bangladesh की विदेश नीतियों में फिर बदलाव होगा.
भारत और BNP में सुधरेंगे रिश्ते?
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि पिछले कुछ वक्त में India और BNP के बीच रिश्तों को Reset करने के संकेत भी मिले हैं. एक दिसंबर को PM Modi ने सार्वजनिक रूप से खालिदा जिया की गंभीर हालत पर चिंता जताई थी और India की तरफ से मदद की पेशकश की थी. इसके जवाब में BNP ने पीएम मोदी का आभार भी जताया था. लिहाज़ा सालों से चले आ रहे तल्ख रिश्तों के बीच इस संवाद को दुर्लभ और अहम राजनीतिक संकेत माना गया.
रहमान-यूनुस से मतभेद देंगे फायदा?

India के लिए राहत की बात ये भी है कि Tarique Rahman के कट्टरपंथी यूनुस सरकार से मतभेद रहे हैं. रहमान ने अंतरिम सरकार के अधिकारों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उसे Long-Term Foreign Policy तय करने का जनादेश नहीं है. साथ ही रहमान ने जमात-ए-इस्लामी की आलोचना करते हुए चुनाव में उसके साथ किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार किया है. इस साल की शुरुआत में Tarique Rahman ने ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नाम की विदेश नीति का खाका पेश किया था जो Donald Trump के ‘अमेरिका फर्स्ट’ नारे से प्रेरित है. उन्होंने कहा था, “न दिल्ली, न पिंडी, सबसे पहले बांग्लादेश”. इस बयान के जरिए उन्होंने साफ कर दिया था कि BNP दिल्ली और रावलपिंडी, किसी के ज्यादा करीब जाने की नीति नहीं अपनाएगी.
