अरावली पर्वत श्रृंखला पर SC के फैसले के बाद पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी… उदयपुर से गुरुग्राम तक वकीलों और पर्यावरण संरक्षकों का विरोध प्रदर्शन. सत्ता पक्ष और विपक्ष भी भिड़े
New Delhi : अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर देशभर में गज्जब का संग्राम देखा जा रहा है… उत्तर भारत की ‘लाइफलाइन’ अरावली को लेकर Social पर भी #SaveAravalli आंदोलन Trend कर रहा है. दरअसल अरावली पर्वत को लेकर Supreme Court ने पर्यावरण मंत्रालय की एक सिफारिश स्वीकार की है जिसके बाद आम लोगों में और पर्यावरण प्रेमियों में खूब नाराजगी देखी जा रही है. कई Environmental Protectors यानी पर्यावरण संरक्षकों की तरफ से भी इसे लेकर प्रदर्शन भी किया जा रहा है.
देश की सबसे पुरानी माउंटेन रेंज है अरावली

राजस्थान के अलावा Haryana के गुरुग्राम और छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में भी पर्यावरण कार्यकर्ताओं और किसानों ने विरोध जताते हुए कहा कि अरावली देश की सबसे पुरानी माउंटेन रेंज है. नए बदलाव से इस Range Ecological Balance को लेकर बड़ा खतरा हो सकता है. Gurugram में पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय लोग बीजेपी सरकार में मंत्री राव नरबीर सिंह के घर पर इकट्ठे हुए और इस फैसले पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया.
अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर हंगामा क्यों?
Supreme Court ने खनन को रोकने के मकसद से अरावली पहाड़ियों की परिभाषा पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के एक पैनल की सिफारिशों को मान लिया है नई परिभाषा में कहा गया कि कोई भी ज़मीन का हिस्सा जो स्थानीय ऊंचाई से 100 मीटर या उससे ज़्यादा ऊंचाई पर है, उसे उसकी ढलानों और आस-पास की ज़मीन के साथ अरावली पहाड़ियों का हिस्सा माना जाएगा यानि 100 मीटर से ऊंची की जमीन को नहीं माना जाएगा होने लगी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति
पर्वत श्रृंखला को लेकर भिड़े कांग्रेस-बीजेपी
अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर बने इस Burning Issue को लेकर अब सत्तारुढ़ बीजेपी और विपक्षी दल भी आमने सामने हो गए हैं. कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार की कमजोर पैरवी के कारण ये हालात बने हैं. वहीं BJP का कहना है कि Congress और राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत इस मसले को लेकर भ्रम फैला रहे हैं.
दिल्ली का पर्यावरण संतुलन क्यों ज़रूरी?

ब्रिटिश काल में दिल्ली को Capital इसलिए बनाया गया क्योंकि एक तरफ Aravalli Hills और दूसरी तरफ Yamuna River थी, जो प्राकृतिक संतुलन बनाए रखती थीं… कोलकाता से Delhi शिफ्ट करने का मुख्य कारण यही पर्यावरणीय फायदा था. Experts का मानना है कि SC को केंद्र सरकार के प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार नहीं करना चाहिए था. Court की अपनी सीमाएं हैं और इस मुद्दे पर Deep Analysis की जरूरत थी.
Save Aravalli अभियान की अपील

अलावली को बचाए जाने के लिए चलाए जा रहे अभियान ‘सेव अरावली ट्रस्ट’ के Experts ने इस फैसले पर गंभीर चिंता जताई है. उनका कहना है कि Haryana में सिर्फ दो चोटियां ही 100 मीटर से ऊपर हैं… पहली तोशाम जो कि भिवानी जिले में है और दूसरी मधोपुरा, जो महेंद्रगढ़ में आती है. बाकी सभी क्षेत्र इस फैसले के बाद अब संरक्षण से बाहर हो सकते हैं. ट्रस्ट ने ऐलान किया है कि वे 150 जिलों के जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे. साथ ही Online Pitition पर अब तक 41,000 लोग साइन कर चुके हैं. इस अभियान का मकसद फैसले के संभावित दुरुपयोग को रोकना है. साथ ही अरावली को पूर्ण संरक्षण दिलाना है.
दिल्ली पर पड़ेगा बुरा असर
Social Media पर यह मामला लगातार Trend कर रहा है. युवा वर्ग पर अपनी बेबाक प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और सोशल मीडिया पर ‘सेव अरावली’ की मुहिम चला रहे हैं. और अगर वाकई पर्यावरण संरक्षकों की ये चिंता सही साबित होती है तो Delhi-NCR समेत पूरे इलाके पर इसका गंभीर असर पड़ेगा… अब सरकारों और समाज की जिम्मेदारी है कि संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए और कैसे भी करके अरावली को बचाया जाए. उत्तर भारत की लाइफलाइन अरावली को बचाने के लिए आप भी सहयोग करें और इस खबर को जमकर Share करें.
