Putin के भारत दौरे से Pakistan-China को सीधा संदेश !
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) 4-5 दिसंबर को तीन साल बाद फिर भारत आ रहे हैं। 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत होगी। यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत-रूस के रिश्ते मजबूत रहे हैं और इस बार की मीटिंग का सबसे बड़ा फोकस है—नई S-400 एयर डिफेंस डील (S-400 Air Defence Deal), जिसमें 50% तक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव है।
भारत-रूस रक्षा साझेदारी
भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर रूस
SIPRI की 2025 रिपोर्ट बताती है कि भारत के हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी घटी है, लेकिन dominence अभी भी उसी के पास है।
- 2009-2014:72–76%
- 2015-2019:55%
- 2020-2024:36%
- फिर भी 60-70% भारतीय हथियार रूसी टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं।
भारत ने फ्रांस (राफेल), अमेरिका (अपाचे), इजरायल (ड्रोन) से नए हथियार लेना शुरू किया है, पर पुराना भरोसेमंद पार्टनर रूस ही है।
मौजूदा बड़े प्रोजेक्ट
- S-400 एयर डिफेंस सिस्टम (5 में से 3 रेजिमेंट भारत को मिल चुकीं)
- सु-30MKI लड़ाकू विमान (HAL में उत्पादन)
- टी-90 टैंक, मिग-29 अपग्रेड
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
- AK-203 राइफल (अमेठी में फैक्ट्री शुरू)
- Ka-226 हेलिकॉप्टर
- नौसेना के लिए स्टेल्थ फ्रिगेट

सबसे बड़ा मुद्दा: नई S-400 डील (2–3 अतिरिक्त रेजिमेंट)
पुरानी डील (2018)
5 रेजिमेंट – 5.43 अरब डॉलर
3 रेजिमेंट तैनात – अंबाला, जोधपुर और सिरसा
बाकी दो 2026 तक मिलेंगी।
नई डील प्रस्ताव
रूस 2–3 और रेजिमेंट देने को तैयार है।
सबसे खास—50% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
- भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) मिसाइलें बनाएगा
- 48N6 मिसाइल का भारतीय उत्पादन (मंजूरी मिल चुकी)
- रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स भी भारत में ही बनेंगे
- रूस की रोस्टेक कंपनी का भरोसा—इस बार कोई देरी नहीं होगी
ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की शक्ति: पाकिस्तान को करारा जवाब
मई 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान S-400 सिस्टम ने अपनी क्षमता साबित कर दी।
- आदमपुर की S-400 यूनिट ने314 किमी दूर पाकिस्तानी विमान मार गिराया
- एक साथ300+ टारगेट ट्रैक
- कुल7 पाकिस्तानी विमान गिराए गए (IAF चीफ एयर मार्शल ए.पी. सिंह ने पुष्टि की)
- सिर्फ5 मिनट में ऑपरेशन रेडी
इसी वजह से भारतीय वायुसेना इसे “सुदर्शन चक्र” कहती है। ये पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर भारत की सबसे मजबूत ढाल बन चुका है।
Putin दौरे में और किन मुद्दों पर बातचीत होगी?
- रूस से सस्ता क्रूड ऑयल और LNG
- कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट के नए यूनिट
- गगनयान मिशन में रूस का सहयोग, GLONASS नेविगेशन
- ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक मिसाइल
- Su-57 फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट प्रस्ताव
- AK-203 राइफल का तेज उत्पादन
भारत, रूस को क्यों नहीं छोड़ सकता?
रूस ही भारत के पुराने हथियारों के स्पेयर पार्ट्स सप्लाई करता है। कीमत कम, भरोसा ज्यादा। अमेरिका और फ्रांस दबाव डालते रहे, लेकिन रूस ने भारत को कभी मना नहीं किया। भारत का 20–25 साल तक भारी सैन्य ढांचा रूसी तकनीक पर ही चलेगा।
Putin का भारत दौरा क्यों अहम है?
इस दौरे से भारत की एयर डिफेंस क्षमता नई ऊंचाई पर जाएगी। नई S-400 रेजिमेंट मिलेंगी, उसका उत्पादन भारत में शुरू होगा और आत्मनिर्भर भारत का सपना और मजबूत होगा। सबसे बड़ा संदेश—
भारत अपनी सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे चुनौती पाकिस्तान से हो या चीन से।
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