सोनीपत की Sunita Dhull को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित… राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 का दिया सम्मान. शिक्षा और बच्चों के भविष्य निर्माण में समर्पण की कहानी.
Sonipat : हरियाणा के सोनीपत की रहने वालीं Teacher Sunita Dhull को 5 सितंबर को Teachers Day के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया… Sunita हरियाणा की इकलौती ऐसी टीचर हैं जिन्हें इस साल National Award मिला है. शिक्षा के क्षेत्र में उनकी अटूट लगन, नवाचार और समर्पण के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया.
सुनीता ढुल का प्रेरणादायक सफर

Sonipat के नसीरपुर गांव की रहने वाली Sunita Dhull वर्तमान में मुरथल अड्डा स्थित पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में सामाजिक विज्ञान पढ़ाती हैं… इसके साथ ही वे Red Cross में राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्यरत हैं और अब तक 14,000 बच्चों को First Aid और जीवन रक्षक कौशल का प्रशिक्षण दे चुकी हैं. सुनीता पिछले डेढ़ साल से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत बच्चों से पौधरोपण करवा रही हैं जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है.
पिता को मिले ताने, फिर भी पढ़ाया

Sunita Dhull का सफर आसान नहीं था… उनके पिता पहले आर्मी और फिर बाद में बिजली निगम में कार्यरत थे. Sunita तीन बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटी हैं. उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की पढ़ाई को महत्व नहीं दिया जाता था. पिता को समाज से ताने सुनने पड़ते थे, जैसे- “बेटियों को क्यों पढ़ा रहे हो, इन्हें तो दूसरे घर जाना है”. लेकिन पिता ने समाज की परवाह नहीं की और हमेशा यही कहा, “बेटी भी पढ़-लिखकर बदलाव लाएगी”.
संघर्षों से भरा रहा जीवन

उनकी मां सुखदेई सुबह 3 बजे उठकर बच्चों को पढ़ाई के लिए जगाती थीं, जिससे Sunita और उनकी बहनों को शिक्षा का अवसर मिला. Sunita रोज 14 किलोमीटर साइकिल चलाकर कॉलेज जाती थीं और अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए ट्यूशन भी पढ़ाती थीं. 1996 में वे B.Ed Entrance Exam में तीसरी टॉपर रहीं. 1996 से 2013 तक उन्होंने निजी स्कूलों में शिक्षिका और प्रिंसिपल के रूप में काम किया. 2014 में उन्हें समालखा के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नौकरी मिली और अब वे मुरथल अड्डा के PM Shri स्कूल में पढ़ाती हैं.
शिक्षा में नवाचार और योगदान
- टाइम टेबल का महत्व – उन्होंने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन सिखाया, जिससे वे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों को संतुलित कर सकें.
- स्टूडेंट कमेटी – 2017 में उन्होंने स्टूडेंट कमेटी बनाई, जिसमें बच्चे स्कूल के विकास के लिए सुझाव देते थे. इससे स्कूल में छात्रों की संख्या 275 से बढ़कर 450 हो गई.
- व्यावहारिक ज्ञान – 2014 से वे प्रदर्शनियां और शैक्षिक भ्रमण आयोजित कर रही हैं ताकि बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक जानकारी भी मिले.
- तकनीक का उपयोग – कोविड-19 के दौरान उनकी बनाई भूगोल की 12वीं कक्षा की वीडियो हरियाणा सरकार के एजुसेट चैनल पर प्रसारित की गईं.
- नैतिक मूल्य – भारतीय पर्वों और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों में सामाजिक और नैतिक मूल्यों का विकास किया.
सख्ती से संवाद तक

शुरुआत में सख्त शिक्षिका के रूप में पहचानी जाने वाली Sunita Dhull ने बाद में मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया… वे बच्चों की समस्याओं को सुनकर समाधान निकालती हैं. उनकी मान्यता है कि शिक्षा केवल पेशा नहीं बल्कि समाज में बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है.
परिवार और प्रेरणा का स्रोत
Sunita Dhull के बेटे अध्ययन ऑस्ट्रेलिया में नौकरी कर रहे हैं जबकि बेटी वंशिका अशोका यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं… उनकी 96 वर्षीय मां सुखदेई और पति पवन ढुल उनकी प्रेरणा हैं. Sunita कहती हैं, “पिता ने बेटियों को बोझ नहीं समझा. उनकी सोच और मां का समर्पण मेरी सबसे बड़ी ताकत है. यह पुरस्कार सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है जो कहती है कि शिक्षा ही समाज में बदलाव की कुंजी है”.
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

President Draupadi Murmu ने 5 सितंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में Sunita Dhull सहित 45 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया… प्रत्येक पुरस्कार विजेता को 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार, एक रजत पदक और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया. Sunita Dhull की कहानी न केवल शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा देती है बल्कि ये भी दर्शाती है कि दृढ़ निश्चय और समर्पण से सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ा जा सकता है.
