Iran में मातम: मिनाब की 160 बेटियों को नम आंखों से अंतिम विदाई
इस समय Iran गहरे शोक में डूबा हुआ है। हाल ही में हुए अमेरिकी-इजरायली हमले में एक प्राइमरी स्कूल की 160 से अधिक छात्राओं की मौत के बाद देशभर में आक्रोश और मातम का माहौल है। दक्षिणी शहर मिनाब में मंगलवार को लाखों लोगों की भीड़ इन मासूम बच्चियों को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ी।
Iran के दूतावास का भावुक संदेश
ऑस्ट्रिया में स्थित Iran के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 160 कब्रों की तस्वीर साझा करते हुए बेहद मार्मिक शब्दों में अपनी पीड़ा व्यक्त की। पोस्ट में लिखा गया कि ये वे बच्चियां थीं जिनकी दुनिया रंगों, कहानियों और मासूम सपनों से भरी थी। लेकिन हिंसा ने उनकी हंसी हमेशा के लिए छीन ली।

दूतावास ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और इसे नैतिक जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना बताया।
मिनाब में उमड़ा जनसैलाब
ईरान के शहर मिनाब में अंतिम संस्कार के दौरान भावनात्मक दृश्य देखने को मिले। सफेद कफन में लिपटे छोटे-छोटे ताबूतों की कतारें सड़कों से गुजरीं। माताएं सीना पीटकर रोती रहीं, पिता गम और गुस्से से भरे नजर आए। बाजार बंद रहे और लोगों ने काली पट्टियां बांधकर विरोध दर्ज कराया।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी इन कब्रों की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि ये हमला मानवता पर चोट है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी-इजरायली बमबारी में मासूम बच्चियों के शरीर तक क्षत-विक्षत हो गए।
बढ़ता संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक Iran में 787 लोगों की मौत हो चुकी है। जंग के चौथे दिन भी राजधानी तेहरान पर हमले जारी रहे। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी International Atomic Energy Agency (IAEA) ने पुष्टि की है कि नतांज स्थित परमाणु केंद्र पर हमला हुआ है, हालांकि किसी रेडिएशन लीक की आशंका से इनकार किया गया है।
Iran में हर ओर गूंजती चीखें
ईरान के अधिकारियों ने इस हमले को निर्दोषों के खिलाफ अमानवीय कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि दुनिया को इस त्रासदी पर चुप नहीं रहना चाहिए। मिनाब की गलियों में उठी सिसकियां अब वैश्विक बहस का हिस्सा बन चुकी हैं।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि युद्ध की कीमत आखिर कौन चुका रहा है — वे मासूम बच्चे, जिनकी दुनिया सिर्फ सपनों और रंगों से भरी होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन बच्चियों की मौत का ज़िम्मदार कौन है ट्रंप-नेतन्याहू या खामेनेई ? दरअसल इस तबाही के लिए पूरी दुनिया अमेरिका-इजरायल के हमले को तो संदेह की नज़रों से देखी रही है, साथ ही ईरान में हाल फिलहाल हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन और उस प्रदर्शन को दबाने के लिए हुई कथित दमनकारी कार्रवाई के लिए खामेनेई की नीतियों पर सवाल उठे हैं,जिसके जवाब में कथित तौर पर ट्रंप ईरान पर अपने सभी हमलों को सही ठहरा रहे हैं, साथ ही ईरान में अक्सर खामेनेई की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित नीतियों से ईरान की जनता ख़ासकर महिलाओं, बेटियों के कथित दमन के आरोप लगते रहे हैं, जिसको आधार बनाकर खामेनेई की नीतियों को एक पक्ष जनविरोधी मानता रहा है, हालांकि खामेनेई की नीतियों पर सवाल उठाए जा सकते हैं, ईरान सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन मौजूदा युद्ध अमेरिका की दुनिया में बढ़ती तानाशाही की ओर इशारा कर रहा है ।
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